फर्जी फास्टैग से करोड़ों के राजस्व को चूना लगाने वाला गिरोह बेनकाब, एक गिरफ्तार
ओवरलोड ट्रकों पर फर्जी नंबर प्लेट का फास्टैग लगाकर ऑनलाइन चालान और मार्ग कर (टोल टैक्स) से बचने का खेल उजागर
एसटीएफ ने आरोपी चालक को दबोचा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित विभिन्न टोल प्लाजा से आवागमन के दौरान फर्जी वाहन नंबर का प्रयोग कर कूटरचित (Fake) फास्टैग के जरिए करोड़ों रुपये के राजस्व की क्षति पहुंचाने और ऑनलाइन चालान से बचने वाले गिरोह पर एसटीएफ (STF) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसटीएफ ने इस गिरोह के एक सक्रिय सदस्य को लखनऊ के मड़ियांव क्षेत्र से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
यह कार्रवाई एआरटीओ लखनऊ (दक्षिणी) द्वारा सरोजनी नगर थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 119/2026 (धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2) बीएनएस) के तहत की गई। इस मामले की विवेचना अपर पुलिस अधीक्षक (एसटीएफ) सत्यसेन के पर्यवेक्षण में निरीक्षक प्रमोद कुमार वर्मा द्वारा की जा रही थी।
ऐसे किया जाता था कूटरचित फास्टैग का खेल
विवेचना के दौरान सामने आया कि मूल वाहन (संख्या UP 32 ZN 8925) के पंजीकृत स्वामी रियाज और उसके सगे भाई सिराज द्वारा वर्ष 2024 से ही कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी वाहन नंबर (MA 34 S 9455) का इस्तेमाल किया जा रहा था। सिराज ने खैराबाद टोल प्लाजा (सीतापुर) के पास मौजूद इंडसइंड बैंक के एजेंट को फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस, मोबाइल नंबर और कूटरचित आरसी (RC) उपलब्ध कराकर फर्जी नंबर पर इंडसइंड बैंक का फास्टैग जारी करवा लिया था।
चालक मुनीश गिरफ्तार, पूछताछ में खोले राज
एसटीएफ की टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर 20 सितंबर 2026 की रात इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे (थाना मड़ियांव) से वाहन चालक मुनीश (निवासी वाकरगंज, लखीमपुर/सीतापुर) को गिरफ्तार किया।
पूछताछ के दौरान मुनीश ने बताया कि वह 1500 रुपये प्रति चक्कर के हिसाब से सिराज की गाड़ी चलाता था। उसने बताया कि गाड़ी मालिकों (सिराज और रियाज) के निर्देश पर वह फर्जी फास्टैग को गाड़ी के विंडस्क्रीन (शीशे) पर चिपकाने के बजाय अपने पास छिपाकर रखता था। ओवरलोड मोरम (खनन पदार्थ) ले जाते समय टोल प्लाजा से गुजरते वक्त वह फास्टैग को हाथ से दिखाकर स्कैन करवा लेता था। इससे टोल पर्ची पर फर्जी नंबर दर्ज हो जाता था और यदि कोई ऑनलाइन चालान होता भी, तो वह फर्जी नंबर की गाड़ी पर दर्ज होता था। इस चालाकी से असली गाड़ी मालिक भारी-भरकम जुर्माने और टोल टैक्स से बच जाते थे।
एसटीएफ ने आरोपी को गिरफ्तार कर सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब गिरोह में शामिल अन्य मुख्य आरोपियों और फर्जी फास्टैग जारी करने वाले एजेंटों की तलाश में जुटी हुई है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
