रीजेंसी हॉस्पिटल,पूर्वांचल में इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर सेवाओं को मिला नया आयाम
गंभीर संक्रमण और सांस की गंभीर परेशानी से जूझ रहे मरीज की बची जान
समय पर इलाज से मिली राहत,दोनों फेफड़ों में गंभीर संक्रमण, ऑक्सीजन स्तर कम-क्रिटिकल केयर टीम ने संभाला जटिल मामला 4 हजार 9 सौ से अधिक मरीजों का सफल इलाज
गोरखपुर (तेजपाल सिंह की रिपोर्ट )।इस क्षेत्र में पहले बेहतर क्रिटिकल केयर और इमरजेंसी सेवाओं वाले अस्पताल की कमी थी। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अक्सर लखनऊ या दिल्ली जाना पड़ता था। रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में गंभीर मरीजों के इलाज और इमरजेंसी सेवाओं को मजबूत किया है। अस्पताल में अब तक 4 हजार 9 सौ से अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका है। यहां 24×7 इमरजेंसी, आधुनिक आईसीयू और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उपलब्ध है। गंभीर संक्रमण, सेष्टिक शॉक, सांस लेने में परेशानी, डायबिटिक कीटोएसिडोसिस, ट्रॉमा और अन्य गंभीर बीमारियों में मरीजों को समय पर इलाज दिया जा रहा है। इससे पूर्वांचल के मरीजों को गंभीर इलाज के लिए दूसरे शहरों में जाने की जरूरत कम होगी।
हाल ही में 56 वर्षीय घनश्याम को बेहद गंभीर हालत में अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। वह बेहोश थे और उनकी ऑक्सीजन सैचुरेशन सिर्फ 27 प्रतिशत थी। जांच में गंभीर इंफेक्शन के कारण सेप्टिक शॉक, फेफड़ों में संक्रमण, निमोनिया, बाएं पैर में गंभीर इंफेक्शन और दिल की धड़कन तेज व अनियमित होने जैसी समस्याएं सामने आईं।
मरीज की हालत को देखते हुए तुरंत सांस की नली में ट्यूब डालकर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया और आईसीयू में भर्ती किया गया। फेफड़े, दिल, किडनी और प्लास्टिक सर्जरी के विशेषज्ञों ने मिलकर इलाज किया। हालत में सुधार के बाद 14 जुलाई को उन्हें वेंटिलेटर से हटा दिया गया और ऑक्सीजन व एनआईवी सपोर्ट दिया गया। बेहतर होने पर उन्हें पहले एचडीयू और फिर सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया गया। 20 जुलाई 2026 को संतोषजनक हालत में उन्हें घर भेज दिया गया। इलाज डॉ. आशुतोष तिवारी, डीएनबी, आईडीसीसीएम और डॉ. आनंद कुमार सिंह, डीएम (क्रिटिकल केयर मेडिसिन) की निगरानी में हुआ।
इसी तरह 37 वर्षीय श्रीमती अनुराधा सिंह को सांस लेने में परेशानी, बेचैनी, पेट दर्द और कई बार उल्टी की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया। उनकी हालत गंभीर थी और ऑक्सीजन का स्तर काफी कम था। जांच में दोनों फेफड़ों में गंभीर संक्रमण के संकेत मिले। मरीज को आईसीयू में भर्ती कर सांस लेने में मदद के लिए बाइपैप सपोर्ट दिया गया। गंभीर निमोनिया, सेप्सिस और शरीर के कई अंगों पर असर की स्थिति को देखते हुए जरूरी जांच और अलग-अलग विशेषज्ञों की देखरेख में इलाज किया गया। फिर मरीज को एचडीयू में शिफ्ट किया गया। इसके बाद मरीज के परिजनों की इच्छा पर अस्पताल से छुट्टी की प्रक्रिया पूरी की गई।
डॉ. आनंद कुमार सिंह- डी.एम. (क्रिटिकल केयर मेडिसिन) ने कहा, "इमरजेंसी में मरीज की हालत को तुरंत समझना, समय पर इलाज शुरू करना और लगातार निगरानी रखना बहुत जरूरी है। डायबिटिक कीटोएसिडोसिस जैसे मामलों में इंसुलिन, शरीर में नमक और खनिजों का संतुलन, ब्लड प्रेशर और आईसीयू मॉनिटरिंग सही समय पर शुरू होना चाहिए। हमारा प्रयास है कि पूर्वांचल के मरीजों को गंभीर और इमरजेंसी हालत में आधुनिक क्रिटिकल केयर सर्विसेज समय पर मिल सकें।"
डॉ. आशुतोष तिवारी- डी.एन. बी, आईडीसीसीएम, ने कहा, "क्रिटिकल केयर में मरीज की गंभीर हालत को जल्दी पहचानना और बिना समय गंवाए इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है। सेष्टिक शॉक, गंभीर इंफेक्शन और सांस की गंभीर समस्या जैसी स्थितियों में शुरुआती समय बहुत अहम होता है। ऐसे मरीजों में वेंटिलेटर सपोर्ट, ब्लड प्रेशर को सामान्य रखने की दवा, इंफेक्शन का इलाज और जरूरत के अनुसार अलग-अलग विशेषज्ञों की संयुक्त देखरेख से बेहतर रिजल्ट हासिल किए जा सकते हैं।"
रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर के वाइस प्रेसिडेंट ऑपरेशन्स संदीप शर्मा ने कहा, "पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों को गंभीर हेल्थ कंडीशन में टाइम पर एक्सपर्ट ट्रीटमेंट उपलब्ध कराना हमारी प्रायोरिटी है। रीजेंसी हॉस्पिटल में क्रिटिकल केयर और इमरजेंसी कंसल्टेंट की अनुभवी टीम 24×7 गंभीर मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध रहती है। अलग-अलग मेडिकल स्पेशलिस्ट्स के बीच बेहतर तालमेल के जरिए हमारा प्रयास है कि मरीजों को गंभीर स्थिति में भी समय पर क्वालिटी ट्रीटमेंट उनके अपने रीजन में मिल सके और उन्हें बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े।"
हॉस्पिटल की क्रिटिकल केयर और इमरजेंसी सर्विसेज में एक्सपर्ट डॉक्टर्स की टीम मरीज की गंभीर हालत को तुरंत समझकर इलाज शुरू करती है। इस टीम में डॉ. आनंद कुमार सिंह डी. एम. (क्रिटिकल केयर मेडिसिन), डॉ. आशुतोष तिवारी- डी.एन.बी, आईडीसीसीएम, डॉ. तितिक्षा सहाय- डी.एन.बी., आईडीसीसीएम, डॉ. कृतिका शर्मा- एमबीबीएस, एमडी, डॉ. मनीष कुमार सिंह- एम.डी. (एनेस्थीसियोलॉजी) और डॉ. सौम्या श्रीवास्तव - एम.डी. (एनेस्थीसियोलॉजी) शामिल हैं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी, लगातार उल्टी, कमजोरी, ब्लड प्रेशर गिरना या गंभीर इंफेक्शन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है। समय पर इलाज से गंभीर जटिलताओं को कम किया जा सकता है। रीजेंसी हॉस्पिटल, गोरखपुर में 24×7 इमरजेंसी, आईसीयू, क्रिटिकल केयर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उपलब्ध है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 33 वर्षों का अनुभव रखने वाले संजय श्रीवास्तव वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के गोरखपुर ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय और प्रशासनिक मुद्दों पर ज़मीनी रिपोर्टिंग के साथ वह निरंतर समाचार कवरेज करते हैं।
