बिजली व्यवस्था सुधारने की मांग, संघर्ष समिति ने रिक्त पद भरने की उठाई आवाज
हटाए गए संविदा कर्मियों को कार्य पर वापस ले सरकार
- मार्च 2023 के आंदोलन के बाद की गई समस्त अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस ली जाए : समिति
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पावर कॉरपोरेशन में सभी स्तरों पर रिक्त पड़े कर्मचारियों एवं अभियंताओं के पदों को तत्काल भरा जाना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही निजीकरण एवं वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर हटाए गए अनुभवी संविदा कर्मियों को तत्काल कार्य पर वापस लिया जाए तथा कर्मचारियों और अभियंताओं के विरुद्ध लंबित अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को समाप्त कर सकारात्मक कार्य वातावरण बनाया जाए।
संघर्ष समिति ने कहा है कि वर्ष 2000 में जब राज्य बिजली बोर्ड का विघटन हुआ था तब प्रदेश में लगभग 60 लाख उपभोक्ता थे और एक लाख बीस हजार नियमित कर्मचारी थे। आज उपभोक्ताओं की संख्या 373 लाख हो गई है और नियमित कर्मचारियों की संख्या 30 हजार से भी काम रह गई है।
ये खबर भी पढ़े : कौशाम्बी पुलिस ने लौटाई 25 लाख की मुस्कान, 121 खोए-चोरी हुए मोबाइल बरामद कर स्वामियों को सौंपा संघर्ष समिति ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना से स्वयं यह तथ्य सामने आया है कि 01 जून 2026 की स्थिति में सहायक अभियंता (विद्युत एवं यांत्रिकी) के 1427 स्वीकृत पदों के सापेक्ष सीधी भर्ती के 518 पद रिक्त हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि अभियंताओं की भारी कमी के बावजूद नियमित भर्ती नहीं की जा रही है। इसी प्रकार प्रदेश के बिजली विभाग में विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों के लगभग 73 हजार पद रिक्त पड़े हैं, जिससे बिजली व्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि एक ओर नियमित पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर निजीकरण और वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर पिछले दो वर्षों में 25 हजार से अधिक अनुभवी संविदा कर्मियों को कार्य से हटा दिया गया है। इन कर्मियों ने वर्षों तक बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके हटाए जाने से विद्युत वितरण, अनुरक्षण एवं उपभोक्ता सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन के उपरांत कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों एवं अभियंताओं पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को वापस लेने के लिए 19 मार्च 2023 को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने आज तक उन निर्देशों का पूर्ण पालन नहीं किया है। इससे कर्मचारियों में असंतोष का वातावरण बना हुआ है और कार्य संस्कृति भी प्रभावित हो रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश में भीषण गर्मी के दौरान बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में यदि सरकार और पावर कॉरपोरेशन निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहते हैं तो उन्हें युद्धस्तर पर नियमित भर्ती प्रारंभ करनी होगी, सभी रिक्त पदों को भरना होगा, हटाए गए संविदा कर्मियों को तत्काल कार्य पर वापस लेना होगा तथा मार्च 2023 के आंदोलन के फलस्वरूप कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों एवं अभियंताओं पर की गई समस्त अनुशासनात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लेकर सकारात्मक एवं सहयोगपूर्ण कार्य वातावरण स्थापित करना होगा। संघर्ष समिति ने कहा कि यही प्रदेश की बिजली व्यवस्था को सुदृढ़, सुरक्षित और उपभोक्ता हित में बनाए रखने का सबसे प्रभावी उपाय है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
