अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट की दान राशि में चोरी का मामला, जांच और पारदर्शिता की मांग तेज

Published By Shishir Patel
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अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े दान की रकम चोरी के मामले में नया खुलासा सामने आया है। जांच में ट्रस्ट के एक पदाधिकारी के कर्मी को इस मामले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। खुफिया एजेंसियों की प्रारंभिक पड़ताल में यह जानकारी सामने आई है, जिसके बाद ट्रस्ट स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, जांच फिलहाल ट्रस्ट के दायरे तक सीमित रखी गई है, जिसके चलते एजेंसियां आगे की कार्रवाई नहीं कर रही हैं। इस मामले में अब तक पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। यह भी सामने आया है कि चोरी की गई दान राशि में से अधिकांश रकम वापस कराई जा चुकी है।

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बताया जा रहा है कि दान के रूप में आने वाली रकम में कई दिनों से गड़बड़ी की आशंका थी। मामले के उजागर होने के बाद इसे लेकर दिल्ली स्तर तक चर्चा हुई, जिसके बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जवाब-तलब भी किया गया। जिस कर्मी को इस मामले में चिन्हित किया गया, उससे पूछताछ के बाद रकम वापस कराने की प्रक्रिया पूरी की गई।

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प्रदेश पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी भी ट्रस्ट के पदाधिकारियों के संपर्क में हैं और जांच में सहयोग कर रहे हैं। इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अब इसे किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराने की तैयारी की जा रही है, ताकि इसमें संलिप्त लोगों की पूरी भूमिका स्पष्ट हो सके।

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इसी बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर एक नया पत्र प्रधानमंत्री को भेजा गया है। इसमें ट्रस्ट की स्थापना से अब तक प्राप्त दान, आय-व्यय, बैंक खातों, भूमि खरीद-फरोख्त और अन्य संपत्तियों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

भाजपा नेता द्वारा इससे पहले 9 जून को प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर राम मंदिर दान राशि में कथित गबन की सीबीआई जांच की मांग की गई थी। अब दोबारा भेजे गए पत्र में ट्रस्ट से पूर्ण वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की गई है।

डॉ. रजनीश सिंह द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि करोड़ों श्रद्धालुओं ने मंदिर निर्माण के लिए अपनी आस्था के साथ धन और आभूषण दान किए हैं, इसलिए उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उनके दान का उपयोग कैसे किया गया। पत्र में प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया है कि ट्रस्ट को निर्देश दिया जाए कि वह अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर समर्पण निधि, ऑनलाइन और नकद दान, बैंक लेन-देन, भूमि रिकॉर्ड, निर्माण खर्च और ऑडिट रिपोर्ट सहित पूरा विवरण सार्वजनिक करे।

लेखक के बारे में

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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।

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