विधायक राजू पाल हत्याकांड के दोषी की सशर्त जमानत मंजूर
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वर्ष 2005 में हुए बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड में दोषी ठहराए गए अभियुक्त आबिद को सशर्त जमानत प्रदान कर दी है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने यह आदेश आपराधिक अपील में दाखिल अर्जी पर दिया।
25 जनवरी 2005 को थाना धूमनगंज, इलाहाबाद में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या कर दी गई थी। इस घटना में देवी लाल पाल और संदीप यादव की भी जान गई थी तथा तीन अन्य घायल हुए थे। मृतक की पत्नी पूजा पाल की शिकायत पर मुकदमा दर्ज हुआ था।
ये खबर भी पढ़े : स्लॉटर हाउस प्रमाणन में आईडी-पासवर्ड आवंटन को लेकर घमासान, पशु चिकित्सा संघ ने निदेशक पर लगाए गंभीर आरोप प्रारम्भ में स्थानीय पुलिस ने जांच की, बाद मे सीबीसीआईडी को सौंपी गई। सर्वाेच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने नए सिरे से जांच कर 10 अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप-पत्र दाखिल किया। ट्रायल कोर्ट ने आबिद सहित अन्य को धारा 120-बी, 147, 148, 307, 302 आईपीसी के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
ये खबर भी पढ़े : यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा आज से, भर्ती परीक्षा के लिए यात्रा करने वाले अभ्यर्थियों को बसों में मिलेगी 50 फीसदी की छूटअदालत ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर की कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में आबिद का नाम नहीं था, केवल सह-अभियुक्तों के बयान के आधार पर नाम जोड़ा गया। कोई टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं हुई, कोई भी आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं की गई।
सर्वाेच्च न्यायालय के तुकेश सिंह बनाम छत्तीसगढ़ (2025) के फैसले के अनुसार केवल डॉकेट पहचान दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकती। 25 आपराधिक मामलों में से 8 में बरी, 2 में फाइनल रिपोर्ट; मात्र लम्बित मामले के कारण जमानत अस्वीकार करने का आधार नहीं हो सकता।
कोर्ट ने कहा प्रतिदिन 200 से अधिक अपीलें सूचीबद्ध होती हैं, निकट भविष्य में अपील की हर सुनवाई संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा मुख्य आरोपित पूर्व सांसद अतीक अहमद और पूर्व विधायक अशरफ दोनों की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो चुकी है, जिससे उनके विरुद्ध मुकदमा समाप्त हो गया। शेष आठ दोषी न तो सांसद हैं न विधायक।
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