युवाओं की लड़ाई को क्रेडिट लेने की होड़
विपक्ष द्वारा इस मुद्दे को जिंदा रखने की जद्दोजहद, सीजीपी का जश्न जारी
लखनऊ। सियासत में आम है कि सत्तापक्ष अपने कार्यो का क्रेडिट लेता है और विपक्ष नाकामी का ठीकरा सरकार पर फोड़ता है। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद क्रेडिट की जंग शुरू हो गई है। गर्मी-बारिश, दिन-रात, बिना दाढ़ी मूछ वाले नेताओं यानी युवाओं की यह जंग राजनीतिक गलियारों में वह मलाई बन गई है जिसका लाभ समूचा विपक्ष लेने को आतुर है। वहीं काकरोच जनता पार्टी से जुड़े युवाओं ने सोमवार को हजरतगंज में जश्न मनाया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अचानक इस्तीफे के बाद सियासत अब कुर्सी से हटकर क्रेडिट पर आ गयी है। पिछले 6 साल में नीट पेपर लीक के मामले तो हुए मगर नई शिक्षा नीति, स्किल इंडिया और नीट में हुए बदलाव सब धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की पहचान भी बने। पेपर लीक की जंग पर परदा पड़ गया है। अब सवाल ये है कि कुछ जो अच्छे फैसले हुए इन फैसलों का ठीकरा और तारीफ कौन लेगा। बीजेपी कह रही है ये मोदी सरकार की नीति थी, कांग्रेस कह रही है फेल होने पर मंत्री हटाए गए और क्षेत्रीय दल अपने-अपने राग छेड़ रहे हैं। इसी बीच बिना दाढ़ी मूछ वाले नेता जो इस बड़े बदलाव के असली हकदार हैं वह कई दिनों से जश्न मना रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का तर्क है कि शिक्षामंत्री के इस्तीफे के बाद बीजेपी ने नैरेटिव सेट करने में लग गयी है। एनईपी 2020 को आगे खड़ा कर दिया है। वह कह रहे हैं कि यह प्रधानमंत्री मोदी का विजन था। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उसे जमीन पर उतारा। अब नए नेतृत्व के साथ इसे और तेजी से लागू किया जाएगा। दरअसल बीजेपी का डर ये है कि अगर जंतर-मंतर की जीत का क्रेडिट विपक्ष के खाते में गया तो यह मुद्दा चुनाव तक गरम रहेगा। इसलिए इस मुद्दे को पीछे कर शिक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों को आगे कर युवाओं को उससे जोड़ा जाये ताकि वह पिछली कड़वी यादें भुला सकें।
राजनीतिज्ञो का मानना है कि विपक्ष जानता है और पेपर लीक और शिक्षा नीति, बेरोजगारी ऐसे मसले हैं जो युवाओं से सीधे जुड़े हैं यदि इन्हें जिंदा रखा जाये तो चुनाव में बीजेपी को बैकफुट पर धकेला जा सकता है। इसलिए शिक्षा नीति में कुनीति का पेंच लगाकर कांग्रेस ने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे को सीधे नीट पेपर लीक से जोड़ दिया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का कहना है कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हुआ तो सरकार ने मंत्री बदल दिया। ये इस्तीफा नहीं है, ये पलायन है। एनईपी कागज पर अच्छी है पर जमीन पर फेल है। सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं, फीस बढ़ रही है, सीयूईटी से ग्रामीण बच्चे बाहर हो रहे हैं। शिक्षा का निजीकरण हर हाल में बंद होना चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता हरीश चन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि धर्मेन्द्र प्रधान का ड़ा कद है उन्हें पुन: 2027 में ओडिशा चुनाव की कमान दी जा सकती है। विपक्ष इस मामले को ठंडा नहीं होने देना चाहता सोमवार को दोनों सदनों में यही मामला छाया रहा जबकि सरकार ने नकल विरोधी कानून को नये सिरे से पेश किया। इससे यह सफा है कि अब युवा ही देश की सियासी दशा एवं दिशा तय करेंगे। यूपी में कुछ माह बाद आम चुनाव होने है ऐसे में युवाओं की धमक बढ़ने के आसार है क्योंकि यूपी में करीब चार करोड़ वोटर युवा है।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
