भारत में पहला गोबर गैस संयंत्र स्थापित कर ऊर्जा के क्षेत्र में लाई थी क्रांति
तीन साल से भारत के इस रत्न को 'भारत रत्न' दिलाने के लिए कर रहे प्रयास
सपा,कांग्रेस और भाजपा के सांसदों ने भी सीएम को लिखा था पत्र
- राज्यपाल के विशेष सचिव ने सीएम के अपर मुख्य सचिव को लिखा था पत्र
लखनऊ। भारत में पहली बार गोबर गैस का संयत्र स्थापित करने वाले आविष्कारक का परिवार उन्हें भार रत्न दिलाने के लिए लगातार मख्यमंत्री और राज्यपाल से पत्राचार कर रहा है। इसके लिए दिसंबर 2022 में राज्य्पाल के विशेष सचिव ने सीएम के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इसके संबंध में कार्रवाई करने के आदेश दिए था। लेकिन मामला वहीं रुक गया। गुरूवार प्रमुख सचिव पशुधन मुकेश मेश्राम ने खुद फोन कर इसकी जानकारी ली। प्रमुख सचिव पशुधन द्वारा ग्रामीण इलाकों के प्राइमरी स्कूल में गोबर गैस से मिड डे मील का भोजन बनाने के लिए योजना बनाई है।
यूपी के सीतापुर जिले के रहने वाले राजेन्द्र सिंह ने बताया कि उनके पिता डॉ. राम बक्श सिंह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित वैज्ञानिक थे, जिन्होंने न केवल अपनी मातृभूमि में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ये खबर भी पढ़े : अंबेडकरनगर पुलिस का सड़क सुरक्षा अभियान, हेलमेट-सीट बेल्ट को लेकर वाहन चालकों को किया जागरूकउन्होंने बताया कि 26 सितंबर 2023 को केंद्र सरकार के अधीन भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार ने डॉ. राम बक्स सिंह के कार्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक अमूल्य संग्रह का महत्वपूर्ण अधिग्रहण किया है। डॉ. राम बक्स सिंह ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उन्होंने 9 सितंबर 1957 को रामनगर गांव में भारत का पहला बायोगैस संयंत्र स्थापित किया। उनकी प्रतिभा का लोहा विदेशों में भी माना गया।
जून 1972 में उन्होंने अमेरिका में पहला गोबर गैस संयंत्र स्थापित किया, जिसका उद्घाटन अलास्का के सीनेटर माइक ग्रैवेल ने किया। वर्तमान समय में एलपीजी संकट एवं ऊर्जा सुरक्षा के दौर में फिर प्रासंगिक हो रहा है उनका मॉडल एनसीईआरटी की कक्षा 9 विज्ञान पाठ्यपुस्तक में भी शामिल किया गया है। उनका योगदान राष्ट्रीय अभिलेखागार, भारत सरकार ने संरक्षित किए हैं उनके ऐतिहासिक अभिलेख भारत सरकार द्वारा स्मारक डाक टिकट को भी दी जा चुकी है।

डॉ. राम बख्श सिंह ने अपने जीवन के 50 से अधिक वर्ष लखनऊ में व्यतीत किए तथा यहीं से ग्रामीण ऊर्जा एवं बायोगैस के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्यों को आगे बढ़ाया। बीते चार वर्षों से भारत के इस वैज्ञानिक रत्न को “भारत रत्न” दिलाने के लिए निरंतर प्रयास जारी है। उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों ने भी पीएम संज्ञान में लाने की कोशिश है। सपा, कांग्रेस एवं भाजपा के सांसदों ने भी पीएम व सीएम को पत्र भेजकर इसकी जानकारी भी दी है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
