भाजपा का सीट शेयरिग पर मंथन तेज
300 प्लस पर स्वयं की तैयारी, बाकी सीटें सहयोगियों को देने का प्लान
जयंत, राजभर, निषाद और अनुप्रिया को संतुष्ठ करने की चुनौती
लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव का अभी कई माह का समय है, चुनावी डंका भी नहीं बजा है। लेकिन सियासी दलों के बीच राजनीतिक बिसात बिछने के साथ ही सीट शेयरिंग पर मंथन तेज हो गया है। इसी क्रम में सत्तासीन भाजपा ने 300 से अधिक सीटों पर स्वयं लड़ने की तैयारी कर रही है। बाकी सीटें सहयोगी दलों को देकर सबको साथ लेकर मिशन 2027 फतह करना चाह रही है।
भाजपा ने यूपी में हैट्रिक लगाने के लिए संगठन को बूथ स्तर पर चुस्त दुरुस्त करने के साथ ही विकास की रफतार तेज करते हुए अब सीट शेयिरंग पर आत्म मंथन कर रही है। क्योंकि गत लोकसभा चुनाव के परिणामों से सबक लेते हुए सहयोगी दलो को साथ लेकर चलना चाहती है। साथ ही भाजपा ने इस बार समय रहते ही अपने किलेबंदी शुरू कर दिया है। 403 सीटों वाले इस विशाल यूपी में सत्ता की हैट्रिक लगाने के इरादे से मैदान में उतरने जा रही। लेकिन बीजेपी की सबसे बड़ी चुनौती अपने कुनबे को एकजुट रखना और सहयोगियों के साथ एक व्यावहारिक 'सीट-शेयरिंग फामूर्ला' तय करना है। इसके लिए बीजेपी ने जो शुरूआती खाका खींचा है, उसमें पार्टी इस बार कोई 'कैजुअल एप्रोच' अपनाने के मूड में नहीं है।
2022 के मुकाबले इस बार एनडीए का कुनबा बड़ा है और इसी वजह से सीटों के बंटवारे का पेच भी उतना ही पेचीदा है। पश्चिमी यूपी में जयंत चौधरी रालोद, पूर्वांचल में ओमप्रकाश राजभर सुभासपा व डॉ. संजय निषाद निषाद पार्टी और काशी-मिजार्पुर बेल्ट में अनुप्रिया पटेल अपना दल-एस जैसे मजबूत क्षत्रपों को साधने के प्रयास तेजकर दिये है। भाजपा 300 प्लस सीटों पर खुद चुनाव लड़ने की रणनीति बना रही है। चर्चा है कि भाजपा सहयोगी दलों को इस बार 70 से 80 सीटें देने की तैयारी में है। 20 से 30 ऐसी सीटें होगी जो सहयोगी दलों के खाते में होंगी लेकिन उन पर भाजपा का चुनाव चिन्ह होगा।
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने खुद 376 सीटों पर चुनाव लड़ा था और बाकी बची केवल 27 सीटें अपने तत्कालीन सहयोगियों अपना दल-एस और निषाद पार्टी को दी थीं। लेकिन इस बार का परिदृश्य अलग है। पश्चिम में जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल और पूर्वांचल में ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा अब एनडीए के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। इस बार सहयोगियों की उम्मीदें और दावे दोनों बड़े हैं। क्षेत्रीय छत्रप खास तौर पर उन सीटों को अपने पाले में चाहते हैं जहां बीजेपी ऐतिहासिक रूप से कमजोर रही है या कभी जीत नहीं सकी है।
एनडीए के इस सीट फॉमूर्ले की खबर बाहर आते ही मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपना लिया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अशोक पाण्डेय ने बताया कि अभी सीट शेयरिंग के किसी फार्मूलें को अंतिमरूप नहीं दिया गया है। चर्चा होना स्वाभाविक है , लेकिन यह तय है कि पार्टी सभी सहयोगियों को पूरा सम्मान देते हुए साथ लेकर चुनाव लड़ेगी। भाजपा को केन्द्र की तरह यूपी में हैट्रिक लगाने से कोई रोक नहीं सकता।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
