एआईपीईएफ ने दिया बिजली कर्मियों के संघर्ष को राष्ट्रीय समर्थन
— इलेक्ट्रिसिटी 2025 के विरुद्ध राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी
लखनऊ। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन की संघीय कार्यकारिणी की शुक्रवार को बेंगलुरु में सम्पन्न बैठक में उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों एवं अभियंताओं के संघर्ष तथा प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 के विरुद्ध महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। संघर्ष समिति ने एआईपीईएफ द्वारा उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के संघर्ष को दिए गए पूर्ण समर्थन का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे प्रदेश के बिजली कर्मियों का मनोबल और अधिक मजबूत हुआ है।एआईपीईएफ ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरुद्ध पिछले 562 दिनों से बिजली कर्मी एवं अभियंता शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से आंदोलन कर रहे हैं। बिजली पंचायतों,बिजली महापंचायतों,विशाल रैलियों और जनसभाओं के माध्यम से यह आंदोलन अब व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर चुका है, जिसमें आम उपभोक्ता भी बड़ी संख्या में भागीदारी कर रहे हैं। एआईपीईएफ ने आंदोलन के दौरान हजारों कर्मचारियों के स्थानांतरण,संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त किए जाने,अनुशासनात्मक नियमों में मनमाने संशोधन,बिना आरोप पत्र एवं बिना स्पष्टीकरण का अवसर दिए सेवा से पृथक करने जैसी कार्यवाहियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इन्हें लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का प्रयास बताया है।
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शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
