जनहित के मुद्दे दरकिनार, शब्दबाणों की बौछार
चुनावी मौसम में वैचारिक एवं व्यक्तिगत होती जुबानी जंग
लखनऊ। सूबे में विधानसभा चुनाव के कछ माह ही बचे है। चुनावी मौसम में नेताओंं के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है। इन शब्दबाणों की बौछार अब वैचारिक एवं व्यक्तिगत होने लगी है। जनहित से जुड़े मुद्दे नदारद हो गये हैं। उन पर चर्चा तक नहीं हा ेरही है। जबकि मतदाता जन समस्याओं पर चर्चा एवं उनका समाधान चाह रहा है। जबकि पक्ष एवं विपक्ष के लगभग सभी राजनीतिक दल वोटरों को लुभाने के लिए बड़े बड़े वायदे कर रहे हैं।
बीते कुछ माह से सूबे में बयानों की बौछार हो रही है। सबसे अधिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं सपा मुखिया अखिलेश यादव के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। मुख्यमंत्री सपा के शासन काल की अनिमियतता, माफिया, भ्रष्टाचार को लेकर तीखा हमला बोल नरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहे है। साथ ही इन दिनों सीएम हर जगह वायदों की पिटारा खोल रहे हैं। हर वर्ग को कुछ न कुछ देकर उसकी नाराजगी दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं सपा मुखिया अखिलेश यादव भी पीछे नहीं है वह वायदे करने के साथ ही सीधे सीएम पर हमला बोल मुख्य विपक्षी दल की जगह बरकरार रखना चाहते हैं। सपा तकरीबन 50 प्रतिशत वोट हासिल करने के लिए पीडीए का माहौल बना रही हैं। जिससे लोकसभा चुनाव की तरह 2027 में भी कामयाबी मिल जाए।
इन दिनों सपा प्रमुख अखिलेश यादव एवं रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी के बीच भी सिचासी जंग तेज हो गयी है। यह जंग इतनी बढ़ गयी कि व्यक्तिगत अरोप की बौछार होने लगी। चवन्नी एवं रुपये के बीच चल रही जुबानी जंग यहां तक पहुंच गयी कि जयंत ने यह कह दिया कि यदि हमने मुंह खोला तो अखिलेश खड़े नहीं हो पायेंगे। नसीहत भी दी कि गठबंधन की बाते सार्वजनिक नहीं की जाती। बात यही नहीं रुकी अखिलेश एवं जयंत के पिता मुलायम सिंह यादव एवं चौधरी चरण सिंह तक पहुंच गयी।
जानकारो का कहना है कि जैसे जैसे चुनाव करीब आयेगा यह जुबानी जंग और तेज होगी। इस जुबानी जंग के बीच जनता से जुड़े मुद्दे गायब हो गये हैं। जबकि बेकाबू मंहगाई, शिक्षा का व्यवसायीकरण, जर्जर सड़कें, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार एवं कानून व्यवस्था पर चर्चा के साथ जनता समाधान चाहती है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ रिचा शर्मा ने बताया कि चुनावी मौसम में यदि जन समस्याओं पर चर्चा नहीं होगी तो कब होगी। क्योंकि चुनाव बाद पांच साल तक कोई नेता हमारी सुध लेने नहीं आता। जनता का ध्यान भटकाने के लिए नेता एक दूसरे की बखिया उधेड़ रहे हैं। इसी के आधार पर नरेर्टिव सेट का चुनावी हथियार के रूप में इसका प्रयोग किया जायेगा।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
