पीड़ितों और बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार पर लखनऊ पुलिस का विशेष प्रशिक्षण, 81 पुलिसकर्मियों ने लिया हिस्सा
लखनऊ।पुलिस और आमजन के बीच भरोसा मजबूत करने तथा पीड़ितों को त्वरित एवं संवेदनशील सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने शुक्रवार को रिजर्व पुलिस लाइन स्थित संगोष्ठी सदन में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को पीड़ितों, महिलाओं और बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार, प्रभावी संवाद कौशल तथा फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस आयुक्त अमरेन्द्र कुमार सेंगर के निर्देशन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मार्गदर्शन संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार, पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अमित कुमावत तथा पुलिस उपायुक्त (महिला अपराध एवं सुरक्षा) ममता रानी चौधरी ने किया। कार्यशाला का संचालन सहायक पुलिस आयुक्त (महिला अपराध) शाहिदा नसरीन के पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ।
प्रशिक्षण के दौरान रिजवाना परवीन, डिविजनल कंसल्टेंट, यूनिसेफ ईवीएडब्ल्यूसीएच, लखनऊ डिवीजन ने पुलिसकर्मियों को पीड़ितों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार, प्रभावी संवाद स्थापित करने की तकनीक तथा किसी घटना के बाद सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाले पुलिसकर्मी (फर्स्ट रिस्पॉन्डर) की जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
पहले व्यवहार से बनता है भरोसा
प्रशिक्षक ने बताया कि किसी भी अपराध या दुर्घटना के बाद पीड़ित व्यक्ति भय, तनाव और मानसिक दबाव की स्थिति में होता है। ऐसे समय पुलिस का पहला व्यवहार ही उसके मन में विश्वास पैदा करता है। इसलिए पुलिसकर्मियों को धैर्य, संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ बातचीत करनी चाहिए, ताकि पीड़ित बिना किसी डर या संकोच के पूरी घटना की जानकारी दे सके।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष फोकस
कार्यशाला में महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों को विशेष प्राथमिकता दी गई। पुलिसकर्मियों को बताया गया कि किसी भी पीड़िता या बच्चे को सुरक्षित और सहज महसूस कराना सबसे पहली जिम्मेदारी है। बातचीत के दौरान उनकी भावनात्मक स्थिति को समझते हुए ऐसा माहौल तैयार किया जाए, जिससे वे बिना भय, संकोच या मानसिक दबाव के अपनी बात खुलकर रख सकें।
प्रभावी संवाद और फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका
प्रशिक्षण में इस बात पर जोर दिया गया कि घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाला पुलिसकर्मी केवल कानून व्यवस्था संभालने तक सीमित न रहे, बल्कि पीड़ित को तत्काल सहायता, सुरक्षा और आवश्यक संरक्षण भी उपलब्ध कराए। इसके साथ ही संवाद कौशल को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न परिस्थितियों पर आधारित व्यवहारिक अभ्यास (रोल प्ले) कराए गए, जिनके माध्यम से पुलिसकर्मियों को वास्तविक परिस्थितियों में प्रभावी संवाद स्थापित करने का प्रशिक्षण दिया गया।
81 पुलिसकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण
इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के 81 पुलिसकर्मियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इस तरह के नियमित प्रशिक्षण से पुलिसकर्मियों की कार्यकुशलता के साथ-साथ पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ेगी, जिससे आमजन का पुलिस पर विश्वास और मजबूत होगा।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
