शिक्षकों को बीएलओ बनाया जा सकता है लेकिन उन पर अनावश्यक दबाव न हो: हाईकोर्ट
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान निर्वाचन आयोग स्कूलों के शिक्षकों को बूथ लेवल अफसर (बीएलओ) के रुप में तैनात कर सकता है लेकिन इससे शिक्षकों के ऊपर अनावश्यक तनाव नहीं होना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने मंगलवार को ये टिप्पणी की। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान स्कूलों के शिक्षकों की तैनाती करते समय शिक्षा के अधिकार कानून के प्रावधानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। निर्वाचन आयोग ने अपने जवाब में कहा कि सेंट मेरीज स्कूल के मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के मुताबिक वो किसी भी शिक्षक को स्कूल के टाइम में उनकी कोई सेवा नहीं लेगा।
निर्वाचन आयोग के इस दावे का याचिकाकर्ता ने विरोध करते हुए कहा कि आयोग ने ये सर्कुलर तब निकाला जब उनकी याचिका उच्च न्यायालय में दाखिल की गई। इसका मतलब है कि याचिका दायर करने के पहले निर्वाचन आयोग सेंट मेरीज स्कूल के फैसले का पालन नहीं कर रहा था। याचिकाकर्ता ने कहा कि स्कूल के शिक्षकों को विरोधाभासी निर्देश मिल रहे हैं। स्कूल के प्रिंसिपल कुछ और निर्देश देते हैं और निर्वाचन अधिकारी कुछ अलग निर्देश देते हैं।
इसके पहले सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग के फैसले पर सवाल खड़ा किया था। वकील अशोक अग्रवाल और राजेश कुमार गोगना की ओर से दायर याचिका में निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग के आदेश के बाद दिल्ली के सरकारी स्कूलों, दिल्ली नगर निगम के स्कूलों और वित्त पोषित स्कूलों के शिक्षकों को बड़े पैमाने पर बीएलओ के रुप में तैनात किया गया है। इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य बाधित हो रहा है जबकि निजी स्कूलों में शिक्षण कार्य ठीक से चल रहा है।
याचिका में कहा गया है कि स्कूलों में शिक्षण कार्य प्रभावित होना बच्चों के शिक्षा पाने के संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 21ए के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग का ये आदेश उच्चतम न्यायालय के निर्वाचन आयोग बनाम सेंट मेरी स्कूल के फैसले के अलावा शिक्षा के अधिकार कानून का भी उल्लंघन है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वकील से पूछा कि क्या आप जो भी फैसला करेंगे उसमें संविधान के अनुच्छेद 324 की आड़ ले लेंगे। आखिर आप किस हैसियत से शिक्षकों को विशेष गहन पुनरीक्षण के काम में लगा रहे हैं। कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से कहा कि आप कहते हैं कि ये स्वैच्छिक है लेकिन जो शिक्षक इस काम को करने से इनकार कर रहे हैं उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा रही है। ऐसे में शिक्षक के पास क्या विकल्प बचता है।
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