RTI को लेकर महाराष्ट्र सरकार बैकफुट पर;
सूचना मांगने पर उद्देश्य बताने का शर्त लिया वापस!
By Rajesh Jaiswal
मुंबई। आम जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें सरकारी निकायों को जवाबदेह ठहराने में मदद के लिए बनाये गए एकमात्र कानून ‘सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005’ में महाराष्ट्र सरकार द्वारा 12 जून 2026 को किए गए कई बदलाव को लेकर काफी विरोध हो रहा था, जिसे गंभीरता से लेते हुए सरकार ने सूचना मांगने का उद्देश्य बताने की शर्त महज एक सप्ताह में वापस ले लिया है।
राज्य सरकार के इस फैसले को लेकर नामचीन सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सूचना मांगने का उद्देश्य बताने की शर्त सही और वैध थी, तो उसे एक सप्ताह में वापस क्यों लिया गया? और यदि वह गलत थी, तो उसे मूल नियमों में शामिल ही क्यों किया गया?
ये खबर भी पढ़े : Mumbai: सुप्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. विजय पंडित को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से किया गया सम्मानितसूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के मूल सिद्धांतों के अनुसार, नागरिक को सूचना मांगने के लिए कारण बताने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे में सरकार का यह यू-टर्न दर्शाता है कि नए नियम पर्याप्त कानूनी और लोकतांत्रिक विचार-विमर्श के बिना तैयार किए गए थे।
गलगली ने यह भी कहा है कि नए बदलावों को विधानसभा के पटल पर प्रस्तुत किए बिना सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा निर्णय जारी किया गया है, जिसकी प्रधान सचिव स्तर पर जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ये घटनाक्रम यह दर्शाता है कि नए नियमों की कई धाराएं जल्दबाज़ी में तथा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की मूल भावना के विपरीत तैयार की गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि अब सरकार को नागरिकता प्रमाण, अपील शुल्क, वकीलों पर प्रतिबंध तथा 150 शब्दों की सीमा जैसी अन्य विवादित शर्तों पर भी पुनर्विचार करना चाहिए।
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लेखक के बारे में
राजेश जायसवाल को पत्रकारिता क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव है। अपने लंबे करियर में उन्होंने समाचार लेखन और रिपोर्टिंग के विभिन्न दायित्व निभाए हैं। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ में कार्यरत हैं।
