हिमाचल: उच्च न्यायालय ने आपदा राहत राशि की वसूली पर लगाई रोक
आठ सप्ताह में जांच पूरी करने के निर्देश
शिमला। वर्ष 2023 की भीषण बारिश और भूस्खलन के बाद राहत राशि पाने वाले कई आपदा प्रभावित परिवारों को अब बड़ी कानूनी राहत मिली है।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राहत राशि वापस जमा कराने के लिए प्रशासन की ओर से जारी रिकवरी नोटिसों पर अंतरिम रोक लगा दी है।
अदालत ने साफ कहा है कि जिन लोगों से राहत राशि वापस मांगी जा रही है, उन्हें पहले अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था।
अब संबंधित उपायुक्त (डीसी) सभी मामलों की नए सिरे से जांच करेंगे और अंतिम फैसला होने तक किसी भी प्रभावित परिवार से राहत राशि की वसूली नहीं की जाएगी।
यह आदेश न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने आपदा प्रभावितों की ओर से दायर कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया।
अदालत ने पाया कि प्रशासन ने रिकवरी नोटिस जारी करने से पहले प्रभावित लोगों को सुनवाई का अवसर नहीं दिया। अदालत ने माना कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करने से पहले उसका पक्ष सुनना जरूरी है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह भी नहीं कहा गया कि याचिकाकर्ताओं ने राहत राशि लेने के लिए कोई फर्जी दस्तावेज जमा किए थे या गलत जानकारी देकर लाभ हासिल किया था।
अदालत ने इस तथ्य को भी अपने आदेश में महत्वपूर्ण माना और कहा कि ऐसे मामलों में पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार अपनाई जानी चाहिए। उच्च न्यायालय
ने संबंधित उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि सभी प्रभावित परिवारों को नोटिस देकर उनका पक्ष सुना जाए और उसके बाद प्रत्येक मामले की नए सिरे से जांच की जाए।
अदालत ने इस प्रक्रिया को आठ सप्ताह के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। जांच पूरी होने और नया आदेश जारी होने तक किसी भी याचिकाकर्ता से राहत राशि की वसूली नहीं की जाएगी।
यह मामला वर्ष 2023 की उस प्राकृतिक आपदा से जुड़ा है, जब हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। कई परिवारों के घर पूरी तरह ढह गए थे और हजारों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ था।
ऐसे प्रभावित परिवारों की मदद के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (आपदा) और राज्य सरकार के विशेष राहत पैकेज के तहत आर्थिक सहायता देने का फैसला किया था। इसी योजना के तहत पात्र लोगों को 65 हजार रुपये की पहली किस्त सहित राहत राशि जारी की गई थी।
बाद में सब-डिवीजनल ऑफिसर (सिविल) की एक जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने कुछ लाभार्थियों को राहत के लिए अपात्र मान लिया।
इसके बाद वर्ष 2025 में इन लोगों को पहले दी गई राहत राशि वापस जमा कराने के लिए रिकवरी नोटिस भेज दिए गए। प्रभावित परिवारों का कहना था कि उन्हें बिना कोई कारण बताए और बिना सुनवाई का मौका दिए राशि लौटाने के आदेश जारी कर दिए गए।
इसी के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय के ताजा आदेश के बाद प्रभावित परिवारों को फिलहाल राहत मिल गई है।
अब प्रशासन को हर मामले की अलग-अलग जांच करनी होगी, सभी संबंधित लोगों की बात सुननी होगी और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर कानून के अनुसार नया फैसला लेना होगा। अदालत के अंतिम निर्देश आने तक किसी भी याचिकाकर्ता से राहत राशि की वसूली नहीं की जा सकेगी।
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