डीएसईयू से सरकारी पॉलिटेक्निक अलग करने की मांग, तकनीकी शिक्षा कर्मियों का पैदल मार्च
एआईसीटीई मानकों के पालन और शिक्षा गुणवत्ता पर जोर
- डीएसईयू से सरकारी पॉलिटेक्निक अलग करने की मांग।
- करीब 200 अधिकारियों और कर्मचारियों ने पैदल मार्च में लिया हिस्सा।
- डीटीटीई को ज्ञापन सौंपकर सेवा हितों की सुरक्षा की मांग।
नई दिल्ली। दिल्ली के सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी (डीएसईयू) से अलग कर पुनः तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय (डीटीटीई) के अधीन लाने की मांग को लेकर मंगलवार को गैजेटेड ऑफिसर्स फोरम फॉर टेक्निकल एजुकेशन, दिल्ली (जीओएफटीई) के आह्वान पर अधिकारियों और कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकाला। मार्च के बाद प्रतिनिधिमंडल ने डीटीटीई को ज्ञापन सौंपकर कर्मचारियों और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों के समाधान की मांग की।
फोरम के अनुसार, दिल्ली के विभिन्न सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों और संबंधित कार्यालयों से करीब 200 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मार्च में भाग लिया।
ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2021 में सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को डीएसईयू में शामिल किए जाने के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों को उनकी सहमति के बिना “डीम्ड डेपुटेशन” पर भेज दिया गया था, जो व्यवस्था अब तक जारी है।
फोरम ने कहा कि इस व्यवस्था से कर्मचारियों के सेवा हित, कैडर अधिकार और भविष्य की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार से सभी सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को पुनः डीटीटीई के अधीन लाने और उन्हें डीएसईयू से अलग करने की मांग की है।
फोरम के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों के शिक्षक और अधिकारी संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के माध्यम से नियुक्त हुए हैं तथा उनकी सेवा शर्तें और शैक्षणिक मानक अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के मानकों के अनुरूप हैं।
ये खबर भी पढ़े : रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी! IRCTC की नई वेबसाइट में मिनटों में होगी टिकट बुकिंगडीएसईयू के अंतर्गत डिप्लोमा तकनीकी शिक्षा से जुड़े एआईसीटीई मानकों और अनुमोदन की उपेक्षा हो रही है, जिससे संस्थानों और छात्रों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
ज्ञापन में कर्मचारियों ने पेंशन, चिकित्सा सुविधाओं, एलटीसी और अन्य सेवा लाभों से संबंधित लंबित मामलों का भी उल्लेख किया। कर्मचारियों ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में इन मुद्दों का संतोषजनक समाधान नहीं हो पाया है।
फोरम ने सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों के बुनियादी ढांचे को लेकर भी चिंता जताई। उसके अनुसार कई संस्थानों में भवनों से पानी टपकने, जर्जर शौचालयों, प्रयोगशालाओं और कार्यशालाओं में आधुनिक मशीनरी की कमी तथा रखरखाव पर अपर्याप्त खर्च जैसी समस्याएं बनी हुई हैं, जिससे तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
फोरम ने कहा कि डीम्ड डेपुटेशन व्यवस्था लागू हुए लगभग पांच वर्ष हो चुके हैं, लेकिन बड़ी संख्या में गजटेड और गैर-गजटेड कर्मचारी अब भी अपने भविष्य, कैडर स्थिति और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर असमंजस में हैं। उन्होंने सरकार से इस संबंध में शीघ्र स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की।
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