CBI के छापे से सिविक सेंटर में हड़कंप, नाज़िया दानिश ने मांगा जवाब
विज्ञापन विभाग में कार्रवाई के बाद एमसीडी की कार्यप्रणाली पर सवाल; भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के मुख्यालय सिविक सेंटर में बुधवार को CBI की कार्रवाई ने निगम के गलियारों में हड़कंप मचा दिया। विज्ञापन विभाग में छापेमारी और एक SSA अधिकारी अनिल खत्री की कथित गिरफ्तारी की खबर के बाद अब एमसीडी की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस की MCD नेता नाज़िया दानिश ने पूरे घटनाक्रम पर जवाबदेही तय करने की मांग की है।
CBI की टीम ने सिविक सेंटर में कार्रवाई के दौरान पहले बेसमेंट-2 और इसके बाद 25वीं मंजिल स्थित विज्ञापन विभाग के कार्यालय में दस्तावेजों और फाइलों की जांच की। सूत्रों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान अनिल खत्री को गिरफ्तार किया गया और उसकी गाड़ी से नकदी बरामद होने की बात सामने आई है। हालांकि, इन दावों पर CBI की विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है।
‘अगर शिकायतें थीं तो कार्रवाई पहले क्यों नहीं?’
नाज़िया दानिश ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ लंबे समय से भ्रष्टाचार की शिकायतें थीं तो संबंधित विभागीय अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने निगम प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की कि विज्ञापन और पार्किंग जैसे संवेदनशील विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है।
उन्होंने कहा कि किसी एक कर्मचारी की गिरफ्तारी को पूरे निगम पर लागू नहीं किया जा सकता, लेकिन यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
विज्ञापन विभाग पर फिर उठे सवाल
विज्ञापन विभाग एमसीडी के महत्वपूर्ण राजस्व से जुड़े विभागों में शामिल है। ऐसे में CBI की कार्रवाई ने विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज कर दी है। सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि अनिल खत्री पर पहले से शिकायतें थीं और वह कुछ अधिकारियों के लिए कथित तौर पर वसूली करता था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी सत्यता जांच के निष्कर्ष से ही स्पष्ट होगी।
नाज़िया का निशाना—जवाबदेही ऊपर तक तय हो
नाज़िया दानिश ने कहा कि जांच केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि जांच एजेंसी को दस्तावेजों, पैसों के लेन-देन या अधिकारियों की भूमिका से जुड़े तथ्य मिलते हैं तो जिस स्तर तक जिम्मेदारी तय होती है, वहां तक जांच पहुंचनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सिविक सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच कार्रवाई को लेकर भय का माहौल बनना अपने आप में गंभीर संकेत है। जरूरत इस बात की है कि जांच एजेंसी तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करे और एमसीडी प्रशासन भी अपने स्तर पर जवाबदेही तय करे।
सवालों के घेरे में निगम का सिस्टम
CBI की बुधवार की कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें पहले से मौजूद थीं तो उन पर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई? विज्ञापन और पार्किंग से जुड़े संवेदनशील कामों में तैनाती और फैसलों की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही? और क्या जांच का दायरा अब अन्य अधिकारियों तक भी पहुंच सकता है?
CBI की जांच आगे बढ़ने के साथ इन सवालों के जवाब
सामने आने की उम्मीद है।
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पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय नीरज अवस्थी दिल्ली में आधारित हैं और मीडिया क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखते हैं। समाचार कवरेज और कंटेंट से जुड़े विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने अपनी मजबूत पहचान बनाई है। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं।
