तमिलनाडु के तिरुवल्लूर गैस रिसाव हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर हुई पांच

कई श्रमिकों की हालत अब भी गंभीर

Published By Sudha Jaiswal
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तिरुवल्लूर । तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के पेरियापालयम क्षेत्र के निकट स्थित एक निजी झींगा प्रसंस्करण (श्रिम्प प्रोसेसिंग) कारखाने में अमोनिया गैस रिसाव से हुए हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि उपचार के दौरान दो और श्रमिकों की मौत हो गई। वहीं कई अन्य मजदूरों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है और उनका विभिन्न अस्पतालों में उपचार जारी है।

यह हादसा रविवार सुबह कन्निकैपेर गांव स्थित एक निजी समुद्री खाद्य निर्यात कंपनी में हुआ था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शीतलन प्रणाली में प्रयुक्त अमोनिया गैस के पाइपलाइन अथवा संबंधित उपकरण में तकनीकी खराबी आने से अचानक गैस का रिसाव शुरू हो गया। कुछ ही मिनटों में जहरीली गैस फैक्ट्री परिसर और आसपास के हिस्सों में फैल गई, जिससे वहां कार्यरत दर्जनों श्रमिक इसकी चपेट में आ गए।

घटना के समय फैक्ट्री में लगभग 120 मजदूर कार्य कर रहे थे। गैस के प्रभाव से 60 से अधिक श्रमिक प्रभावित हुए। अधिकांश श्रमिकों को सांस लेने में गंभीर परेशानी, आंखों में तेज जलन, चक्कर आने और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा। कुछ श्रमिक फैक्ट्री परिसर और श्रमिक आवास में ही बेहोश होकर गिर पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई लोगों के नाक और मुंह से खून भी निकलने लगा था, जिसके बाद पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और चिकित्सा दल मौके पर पहुंच गए। प्रभावित श्रमिकों को तत्काल एंबुलेंस और अन्य वाहनों की मदद से विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब तक पांच श्रमिकों की मौत हो चुकी है। इनमें तीन मरीज निजी अस्पतालों में उपचाराधीन थे, जबकि दो अन्य श्रमिकों की मौत सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान हुई। अधिकारियों ने बताया कि कुछ अन्य मरीजों की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

चिकित्सकों का कहना है कि बड़ी मात्रा में अमोनिया गैस शरीर में प्रवेश करने से कई श्रमिकों के फेफड़ों और श्वसन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा है। कई मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है, जबकि गंभीर रूप से प्रभावित लोगों का उपचार गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में किया जा रहा है। कुछ मरीजों को वेंटिलेटर सहायता भी दी जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, चेन्नई और तिरुवल्लूर के विभिन्न अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी है। वेल्स निजी अस्पताल में 29 श्रमिक भर्ती हैं, जबकि एक अन्य निजी अस्पताल में 18 लोगों का उपचार चल रहा है। इसके अलावा चेन्नई के स्टेनली गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 10 श्रमिकों को विशेष चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

हादसे के बाद जिला प्रशासन, तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, फैक्ट्री सुरक्षा विभाग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गैस रिसाव का वास्तविक कारण क्या था और फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया जा रहा था।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच का मुख्य केंद्र फैक्ट्री की गैस सुरक्षा प्रणाली, चेतावनी अलार्म, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और सुरक्षा उपकरणों की कार्यक्षमता है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में लापरवाही या सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो फैक्ट्री प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर झींगा प्रसंस्करण कारखाने को सील करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। साथ ही प्रभावित श्रमिकों और उनके परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

इस बीच, राज्य सरकार ने घायलों के उपचार की सतत निगरानी करने और पीड़ित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं। -------------

लेखक के बारे में

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सुधा जायसवाल ने मास कम्युनिकेशन एवं पत्रकारिता (MJMC) में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है और पत्रकारिता क्षेत्र में 12 वर्षों से सक्रिय हैं। वह अमर उजाला, स्वतंत्र भारत, जनसंदेश टाइम्स और तरुण मित्र जैसे संस्थानों में कार्य कर चुकी हैं। राजनीतिक, शिक्षा और नगर निगम सहित विभिन्न बीट्स पर रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाली सुधा वर्तमान में तरुण मित्र के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई हैं।

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