69000 शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट सख्त, आज हुई सुनवाई
कहा बेरोजगार अभ्यर्थियों को औऱ इंतजार नहीं करवाएंगे
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69000 शिक्षक भर्ती मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ के समक्ष हुई। कोर्ट ने अधिवक्ताओं के पक्ष सुनने के बाद टिप्पणी करते हुए कहा हम बेरोजगार अभ्यर्थियों को और इंतजार नहीं करवाएंगे। कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता से कहा कि सभी पक्षकारों की कटेगरी बनाकर ले आए। हम सभी को सुनेंगे। इस प्रकरण की लगातार सुनवाई भी करने को कोर्ट तैयार है। कोर्ट यह भी कहा की अब किसी भी नए पक्षकार को पार्टी बनने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सरकार की तरफ से मौजूद अधिवक्ता अंकित गोयल ने सभी पक्षकरों की कटेगरी बनाने के लिए कोर्ट से समय मांगा है। अब इस मामले की सुनवाई 8 सितंबर को होगी। संबंधित प्रकरण की यह जानकारी अमरेंद्र पटेल ने दी। उन्होंने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सितंबर 2024 से लंबित है। लेकिन जिस प्रकार से कोर्ट ने सख्ती दिखाई है उससे लग रहा है कि मामला जल्द निस्तारित हो जाएगा। 8 सितंबर से इस मामले की लगातार सुनवाई भी हो सकती है।
ये खबर भी पढ़े : महिला के कपड़े यौन उत्पीड़न का बहाना नहीं’, दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपी को ठहराया दोषीउन्होंने बतया की बीते 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान विभाग ने एक एफिडेविट प्रस्तुत किया था । एफिडेविट में कुल 8270 पदों का आकड़ा सूची सहित दिया गया हैं। जिसमें यह बताया गया कि 3324 पद ओबीसी वर्ग के ऐसे हैं जिन्हें नौकरी में पहले से होना चाहिए था लेकिन नौकरी में नियुक्त नहीं हो पाए। विभाग ने 4946 पदों का एक आकड़ा ऐसा दिया हैं जो विरोधाभासी है।
4946 पदों का आंकड़े को बताया गया कि यह उन अभ्यर्थियों का है जिन्हें नौकरी के लिए बुलाया गया था लेकिन कोई ज्वाइन नहीं किया। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब 4946 पद पर कोई अभ्यर्थी ज्वाइन करने नहीं आए तो उनका नाम अभी तक क्यों बरकरार रखा गया है। पटेल ने कहा की यदि सरकार 3324 के साथ-साथ रिक्त 4946 पदों पर (यानी कुल 8270) एक साथ नियुक्ति दे देती है तो हम सभी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी सहमत हैं।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
