यूपी गैंगस्टर एक्ट में गंभीर खामी सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर कानून को शुरू से ही दोषपूर्ण करार दिया
- अपराध का सृजन किए बिना सीधे सजा का प्रावधान करना गंभीर खामी: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर कानून को शुरू से ही दोषपूर्ण करार दिया है। न्यायालय ने कहा कि इसमें किसी नए अपराध को परिभाषित किए बिना ही सजा का प्रावधान कर दिया गया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कानून में केवल 'गैंग' और 'गैंगस्टर' की परिभाषा दी गई है, जबकि जिन गतिविधियों को इसमें शामिल किया गया है, वे पहले से ही भारतीय दंड संहिता और अन्य आपराधिक कानूनों के तहत दंडनीय हैं।
न्यायालय ने कहा कि किसी अलग अपराध का सृजन किए बिना सीधे सजा का प्रावधान करना कानून की गंभीर खामी है। न्यायालय ने अपने फैसले में मशहूर लेखक जॉर्ज ऑरवेल का भी हवाला दिया। न्यायालय ने कहा कि हिंसा रोकने के नाम पर बनाया गया यह कानून कई मामलों में निर्दोष और अनजान नागरिकों के खिलाफ हिंसा और दमन को बढ़ावा देता नजर आता है।
न्यायालय ने दो वकीलों के खिलाफ चल रही कार्रवाई को रद्द करते हुए ये टिप्पणी की। न्यायालय ने दो वकीलों शिव प्रताप सिंह और हिमांशु श्रीवास्तव से जुड़े बार एसोसिएशन के चुनाव से जुड़ा था। चुनावी विवाद और उससे जुड़े अनुशासनात्मक एवं आपराधिक मामलों के बाद उन्हें कथित गैंग का सदस्य बताकर गैंगस्टर एक्ट के तहत नामजद किया गया था।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
