ना पंखा-ना आवाज पर ठंडक बेमिसाल, प्लाज्मा कूलिंग टेक्नोलॉजी कैसे करती है काम
नई दिल्ली। आप किसी ऐसे पंखे के बारे में सोच सकते हैं जो न दिखाई दे और न कभी आवाज करे, जिसमें न कोई ब्लेड हो और न ही कोई मोटर। फिर भी वह गर्मी को ऐसे भगाए जैसे कि कोई AC। दरअसल यह कोई काल्पनिक बात नहीं बल्कि नई टेक्नोलॉजी है जिसे प्लाज्मा कूलिंग टेक्नोलॉजी कहा जाता है। इस तकनीक को उन डिवाइसेज को ठंडा रखने के लिए तैयार किया गया है जिनमें साधारण कूलिंग फैन आदि नहीं लगाए जा सकते। इतना ही नहीं ये कमाल की तकनीक भविष्य में हमारे गैजेट्स से लेकर अंतरिक्ष तक की मशीनों को बदलने का दम रखती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बिना पंखे-आवाज या वाइब्रेशन वाली ये तकनीक आखिर गैजेट्स और डिवाइसेज को बर्फ जैसा ठंडा कैसे रखती है? दरअसल इस तकनीक की खासियत है कि यह बिजली की तरंगों से हवा को ही एक अदृश्य पंखे में बदल देती है, जो बिना किसी हलचल के सीधे प्रोसेसर की गर्मी को सोख लेता है।
प्लाज्मा कूलिंग टेक्नोलॉजी बेहद अनोखी तकनीक है जिसमें पंखे ही नहीं बल्कि किसी वाइब्रेशन आदि का भी इस्तेमाल नहीं होता।
जहां आजकल के लैपटॉप या कंप्यूटर सिस्टम में हमें कूलिंग के लिए पंखे लगे दिख जाते हैं, जो कि शोर भी करते हैं लेकिन प्लाज्मा कूलिंग टेक्नोलॉजी इससे बिलकुल उलट बिना किसी आवाज या शोर के बिलकुल सन्नाटे में डिवाइस को कूल करती है।
ये खबर भी पढ़े : कोलकाता श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर आयोजित समारोह में 3 स्वदेशी युद्धपोत नौसेना को समर्पितइस तकनीक की खासियत है कि इसमें कोई हिलने-डुलने वाला पुर्जा नहीं होता। इस वजह से कोई पार्ट घिसता नहीं है और यह सालों-साल बिना रुके काम कर सकता है।
इसकी अगली खासियत है कि प्लाज्मा कूलिंग टेक्नोलॉजी किसी भी डिवाइस में बहुत कम जगह लेती है और इसी वजह से इसे उन डिवाइसेज में इस्तेमाल किया जाता है, जो कि काफी छोटे या पतले होते हैं मसलन स्लिम फोन या लैपटॉप आदि।
अब क्योंकि प्लाज्मा कूलिंग टेक्नोलॉजी कम पुर्जों की मदद से काम करती है इसलिए इसे बेहद कम वोल्टेज की जरूरत पड़ती है। इससे यह गैजेट की बैटरी और बिजली की बचत दोनों कर पाती है।
क्या घरों को ठंडा करती है ये तकनीक?
इसका जवाब है नहीं। प्लाज्मा कूलिंग टेक्नोलॉजी को उन डिवाइसेज और मशीनों को ठंडा करने के लिए बनाया गया है, जिन्हें साधारण फैन या बाकी कूलिंग ऑप्शन से ठंडा नहीं किया जा सकता। इसे कूलिंग टेक्नोलॉजी को मुख्य रूप से:चौबीस घंटे चलने वाले भारी-भरकम प्रोसेसर और डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल बेहद पतले फोन-लैपटॉप और गेमिंग डिवाइसेज में भी होता है, जहां पंखों को लगा पाना संभव नहीं होता।
ईवी की बैटरियों को गर्म होने से बचाने के लिए भी प्लाज्मा कूलिंग टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होती है।
अंतरिक्ष में जाने वाले उपकरणों और सैटेलाइट्स के नाजुक सेंसरों को बिना किसी वाइब्रेशन के ठंडा रखने के लिए प्लाज्मा कूलिंग टेक्नोलॉजी काम में ली जाती है।
इसके अलावा इस तकनीक का इस्तेमाल मिलिट्री ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और रडार में बिना आवज के कूलिंग करने के लिए किया जाता है।
कैसे काम करती है प्लाज्मा कूलिंग टेक्नोलॉजी?
जहां आम तौर पर पंखे मोटर की मदद से घूमकर डिवाइस को ठंडा करते हैं वहीं प्लाज्मा कूलिंग टेक्नोलॉजी में डिवाइस में मोजूद एक खास किस्म की गैस पर हाई वोल्टेज बिजली छोड़ी जाती है। इस बिजली के संपर्क में आते ही हवा के कण चार्ज हो जाते हैं और कोल्ड प्लाज्मा में बदल जाते हैं।
इस तकनीक में जैसे ही हवा के कण चार्ज होते हैं वैसे ही बिजली के कारण तेजी से एक इलेक्ट्रोड दूसरे की ओर भागने लगते हैं।
जब हवा के कण तेज रफ्तार से दौड़ते हैं, तो ये अपने साथ हवा के सामान्य अणुओं को भी अपने साथ घसीट ले जाते हैं। इससे हवा में ऐसा बहाव पैदा होता है जैसा कि किसी पंखे के चलने से होता है। टेक्निकल भाषा में इसे आयनिक विंड भी कहा जाता है।
यह अदृश्य और महसूस न होने वाली आयनिक विंड पंखे के बिना ही गर्म हो रहे प्रोसेसर, चिप या डिवाइस को ठंडा करती है। इसकी मदद से गर्म हवा डिवाइस से बाहर निकल जाती है और डिवाइस को शांत रहते हुए ही बिल्कुल ठंडा कर देती है।
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