बीसीआई चेयरमैन के इस्तीफे की मांग, वकीलों ने तेज की आवाज
बीसीआई चेयरमैन मनन मिश्रा के इस्तीफे को लेकर वकीलों का प्रदर्शन
नई दिल्ली। हैदराबाद स्थित नेशनल अकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (नालसार) के अंतिम वर्ष के लॉ स्टूडेंट का एनरॉलमेंट रोकने संबंधी बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरमैन मनन मिश्रा के सर्कुलर के बाद उनके इस्तीफे की मांग ने जोर पकड़ ली है।वकीलों के एक समूह ने गुरुवार को बीसीआई दफ्तर पर प्रदर्शन किया। कल यानी 21 अगस्त को ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (एआईएलयू) ने भी मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है।
वकीलों ने राऊज एवेन्यू स्थित बीसीआई दफ्तर पर प्रदर्शन किया। इन वकीलों का कहना है कि मनन मिश्रा वकीलों का भला न कर उसके खिलाफ ही सर्कुलर जारी करते हैं। शाहदरा बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव रमन शर्मा ने कहा कि किसी वकील का बीसीआई के चेयरमैन के रुप में अनिश्चितकालीन कार्यकाल कैसे हो सकता है।
ये खबर भी पढ़े : बंगाल के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी की फंदे से लटकी मिली लाश, सुसाइड नोट बरामदएआईएलयू के राष्ट्रीय महासचिव और उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ वकील पीवी सुरेंद्रनाथ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 16 अगस्त को कोच्ची में हुई नेशनल काउंसिल की बैठक ने मनन मिश्रा के मनमाना और अलोकतांत्रिक फैसले की आलोचना की। एआईएलयू के बयान में कहा गया है कि मनन मिश्रा ने बीसीआई की गरिमा और स्वायतता का अपमान किया है। एआईएलयू ने मनन मिश्रा के तुरंत इस्तीफे की मांग की है। इसी कड़ी में देशभर में एआईएलयू से जुड़े वकील मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग के लिए प्रदर्शन करेंगे।
13 अगस्त को बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के हस्ताक्षर से एक सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें नालसार के अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश के शामिल होने का विरोध करने वाले छात्रों को बतौर वकील रजिस्ट्रेशन करने पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था। मनन कुमार मिश्रा के हस्ताक्षर से जारी इस सर्कुलर के जारी होते ही इसका जमकर विरोध होने लगा।
केरल बार काउंसिल और बीसीआई के सदस्य एन मनोज कुमार ने विरोध जताते हुए मनन मिश्रा को पत्र लिखा। वकीलों के संगठन ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (एआईएलयू) और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने भी मनन मिश्रा के इस सर्कुलर की आलोचना करते हुए वापस लेने की मांग की।
सर्कुलर के बढ़ते विरोध के बाद मनन मिश्रा ने छात्रों का बतौर वकील रजिस्ट्रेशन नहीं करने के पहले के आदेश 13 अगस्त को वापस ले लिया। हालांकि इस सर्कुलर पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सख्त नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि बीसीआई का रुख बिल्कुल गलत है। यह लॉ स्टूडेंट और उनके बीच का मामला है, ऐसे में बीसीआई कौन होते हैं मुद्दा उठाने वाले। यह बिल्कुल गलत है। बाद में मनन मिश्रा ने छात्रों से माफी भी मांगी लेकिन अब मामले ने तूल पकड़ लिया है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
