'हितं यत्सर्वभूतानाम...' पीएम मोदी ने साझा किया जीवन को दिशा देने वाला सुभाषित
पीएम मोदी ने साझा किये अपने विचार बोले “निःस्वार्थ कर्म ही मानवता की सबसे बड़ी शक्ति
- प्रधानमंत्री मोदी ने दिया निस्वार्थ सेवा और समर्पण का संदेश
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निस्वार्थ सेवा, लोक कल्याण और समर्पण की भावना को रेखांकित करते हुए एक्स पर आज सुभाषितम् साझा किया। उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही मानवता की सबसे बड़ी शक्ति है और इसी सेवा-भाव के साथ देश प्रत्येक नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
सुभाषितम् इस प्रकार है- “हितं यत्सर्वभूतानामात्मानश्च सुखावहम्। तत्कुर्यादीश्वरे ह्येतन्मूलं सर्वार्थसिद्धये।। ” इसका अर्थ है कि मनुष्य को केवल वही कार्य करने चाहिए जो सभी प्राणियों के हित में हों और जिनसे उसकी आत्मा को सुख एवं शांति प्राप्त हो। यही ईश्वर के प्रति सच्चा समर्पण है तथा यही सभी प्रकार की सफलता और आध्यात्मिक सिद्धि का मूल आधार है।
ये खबर भी पढ़े : मणिपुर: सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, हथियारों का जखीरा बरामद; कई उग्रवादी गिरफ़्तार प्रधानमंत्री ने कहा, “निःस्वार्थ कर्म ही मानवता की सबसे बड़ी शक्ति है। हम सेवा और समर्पण के इसी भाव के साथ हर किसी के जीवन को बेहतर बनाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।”
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
