एक्सक्लूसिव: दिल्ली में साथ... फतेहपुर में अलग! इंडिया गठबंधन की जमीनी हकीकत पर उठे बड़े सवाल
- राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता का दावा, लेकिन स्थानीय स्तर पर अलग-अलग प्रदर्शन
- राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर कांग्रेस का अकेले प्रदर्शन, महंगाई-बेरोजगारी पर सपा के आंदोलन में कांग्रेस नहीं दिखी
नफीस अहमद उर्फ़ मुन्ना राईन
- जिलाध्यक्षों ने बताया अपना-अपना पक्ष, कहा— समय आने पर निभाया जाएगा गठबंधन धर्म
फतेहपुर। राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ एकजुटता का संदेश देने वाला इंडिया गठबंधन फतेहपुर में जमीनी स्तर पर बिखरा हुआ नजर आ रहा है। दिल्ली और लखनऊ में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य सहयोगी दलों के शीर्ष नेता एक मंच साझा करते दिखाई देते हैं, लेकिन जिले में जनहित और राजनीतिक मुद्दों पर दोनों प्रमुख दल अलग-अलग आंदोलन करते नजर आ रहे हैं।
हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने जिले में विरोध प्रदर्शन और सद्बुद्धि यात्रा निकाली। इस कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी की भागीदारी नहीं दिखी। वहीं इससे पहले महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर समाजवादी पार्टी ने प्रदर्शन किया था, लेकिन उस आंदोलन में कांग्रेस शामिल नहीं हुई। इन घटनाओं के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता का दावा करने वाला इंडिया गठबंधन स्थानीय स्तर पर साझा कार्यक्रम और संयुक्त आंदोलन क्यों नहीं कर पा रहा है।
आम मतदाताओं और राजनीतिक जानकारों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि गठबंधन मजबूत है तो उसकी झलक धरातल पर क्यों नहीं दिखाई देती। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत उसकी संयुक्त राजनीतिक उपस्थिति होती है। यदि सहयोगी दल अलग-अलग आंदोलन करेंगे तो जनता के बीच गठबंधन की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनका कहना है कि संयुक्त धरना-प्रदर्शन और साझा जनसंपर्क अभियान गठबंधन को अधिक मजबूती से प्रस्तुत कर सकते हैं।
हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि प्रत्येक राजनीतिक दल का अपना संगठन, कार्यशैली और कार्यक्रम होते हैं। ऐसे में हर आंदोलन में सभी दलों की मौजूदगी संभव नहीं होती। फिर भी बड़े राजनीतिक मुद्दों पर साझा उपस्थिति गठबंधन की एकजुटता का संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कुछ दिन पहले हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत अन्य सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं ने भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति पर चर्चा की थी।
लेकिन फतेहपुर में अब तक उसी तरह का समन्वय देखने को नहीं मिला है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि विपक्ष भाजपा को प्रभावी चुनौती देना चाहता है तो शीर्ष स्तर की बैठकों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी संयुक्त अभियान चलाना आवश्यक होगा।
क्या बोले दोनों जिलाध्यक्ष
"समाजवादी पार्टी इंडिया गठबंधन का हिस्सा जरूर है, लेकिन अभी तक न तो सीटों का बंटवारा हुआ है और न ही गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक निर्णय हुआ है। ऐसे में हर दल की अपनी रणनीति और कार्यशैली है। कांग्रेस लगातार हर जनहित के मुद्दे पर सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रही है। जब भी हाईकमान का निर्देश मिलेगा, तब संयुक्त कार्यक्रमों पर निर्णय लिया जाएगा। अभी तक पार्टी की ओर से साथ मिलकर प्रदर्शन करने का कोई निर्देश नहीं आया है।" - महेश द्विवेदी, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस पार्टी
"समाजवादी पार्टी निश्चित रूप से इंडिया गठबंधन का अहम हिस्सा है। फिलहाल दोनों दल अपने-अपने संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर किसी तरह का मतभेद नहीं है। चुनाव आने पर गठबंधन धर्म का पूरी निष्ठा के साथ पालन किया जाएगा और सभी सहयोगी दल एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाएंगे।" - सुरेन्द्र प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
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लेखक के बारे में
नफ़ीस अहमद पत्रकारिता क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव रखते हैं। वर्ष 2018 से फतेहपुर जिला मुख्यालय में मान्यता प्राप्त पत्रकार के रूप में सक्रिय हैं। इससे पहले वह कई प्रिंट मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ में फतेहपुर ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं और जिले से जुड़े महत्वपूर्ण समाचारों की तथ्यपरक एवं निष्पक्ष रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
