हरिवंश फिर होंगे राज्यसभा के उपसभापति,विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया से बनाई दूरी
नई दिल्ली। राष्ट्रपति की ओर से नामित हरिवंश ने गुरुवार को राज्यसभा सचिवालय में उपसभापति पद के लिए नामांकन किया। वे जनता दल(यू) से सदन में दो बार निर्वाचित एवं दोनों बार राज्यसभा के उपसभापति रहे हैं। राज्यसभा में कल उपसभापति का निर्वाचन होगा। विपक्ष ने कुछ मुद्दों पर आपत्ति जाहिर करते हुए निर्वाचन प्रक्रिया से दूरी बनाने का फैसला किया है। इसका अर्थ है कि बिना विरोध हरिवंश फिर से उपसभापति बन जायेंगे।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पोस्ट में कहा कि विपक्ष ने कल निर्वाचन प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है। हालांकि इसके पीछे हरिवंश का निरादर करने का कोई ईरादा नहीं है। विपक्ष को उम्मीद है कि हरिवंश अपने तीसरे कार्यकाल में विपक्ष के अनुरोधों के प्रति अधिक सहिष्णु और ग्रहणशील होंगे।
जयराम रमेश ने तीन आपत्तियां जताई है। उनका कहना है कि 7 सालों से लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद खाली है। राज्यसभा में राष्ट्रपति की ओर से मनोनीत किसी व्यक्ति को इससे पहले कभी भी उपसभापति पद के लिए विचार नहीं किया गया है। वहीं, उन्हें तीसरी बार मौका देते समय विपक्ष से विचार भी नहीं किया गया।
ये खबर भी पढ़े : पश्चिम बंगाल में सियासी संग्राम तेज, टीएमसी का धरना-प्रदर्शन, भाजपा ने लगाए धांधली के आरोपपिछले माह राष्ट्रपति ने हरिवंश को राज्यसभा का सदस्य नामित किया था। हरिवंश नारायण सिंह का 9 अप्रैल को उपसभापति के तौर पर कार्यकाल समाप्त हो गया। तब से यह पद खाली है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। उनकी अनुपस्थिति में उपसभापति सदन का संचालन करते हैं।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
