तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव, द्रमुक को झटका, अलग हुई एमडीएमके

वाइको की पार्टी ने गठबंधन तोड़ा, भविष्य की रणनीति पर बाद में फैसला

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2017 से द्रमुक के साथ थी एमडीएमके, राजनीतिक पहचान कमजोर होने का लगाया आरोप

  • दो विधायकों की गैरमौजूदगी से बढ़ीं अटकलें, नए सियासी समीकरणों की चर्चा तेज

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में शनिवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन से अलग होने का औपचारिक निर्णय ले लिया। पार्टी महासचिव वाइको की अध्यक्षता में हुई महासभा की बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया। इस फैसले के साथ ही राज्य की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावनाएं तेज हो गई हैं।

महासभा से एक दिन पहले पार्टी की उच्चस्तरीय समिति की बैठक हुई थी, जिसमें गठबंधन की स्थिति और भविष्य की रणनीति पर प्रारंभिक चर्चा की गई। शनिवार को आयोजित महासभा में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने द्रमुक के साथ संबंधों पर अपने विचार रखे। लंबी चर्चा के बाद पार्टी ने गठबंधन से अलग होने का प्रस्ताव पारित कर दिया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उसका फैसला केवल द्रमुक गठबंधन से अलग होने का है। आगामी चुनावों में किस दल के साथ गठबंधन किया जाएगा, इसका निर्णय समय आने पर लिया जाएगा।

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एमडीएमके ने प्रस्ताव में कहा कि वह वर्ष 2017 से द्रमुक के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन का हिस्सा रही है। पार्टी का कहना है कि उसने सांप्रदायिक राजनीति का विरोध करने और द्रविड़ आंदोलन की वैचारिक प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने के उद्देश्य से इस गठबंधन का साथ दिया था। हालांकि, वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान गठबंधन के भीतर ऐसे हालात बने, जिनसे एमडीएमके की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और पिछले 32 वर्षों के संघर्षपूर्ण राजनीतिक योगदान को कमजोर करने का प्रयास हुआ। इसके बावजूद पार्टी ने गठबंधन धर्म निभाते हुए चुनाव लड़ा।

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प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य की राजनीति में कुछ ऐसी गतिविधियां हुईं, जो जनता के जनादेश और गठबंधन की मूल भावना के अनुरूप नहीं थीं। पार्टी का दावा है कि कुछ प्रभावशाली शक्तियों ने धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन की वैचारिक दिशा को कमजोर कर दिया। ऐसे माहौल में गठबंधन में बने रहना पार्टी के सिद्धांतों और राजनीतिक हितों के अनुरूप नहीं था, इसलिए अलग होने का फैसला लिया गया।

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बैठक के दौरान पार्टी के दो विधायक-कडैयनल्लूर से राजेंद्रन और सीरकाझी से सेंथिल सेल्वन-अनुपस्थित रहे। उनकी गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चचार्एं शुरू हो गई हैं। मीडिया में यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि दोनों विधायक अपने पद से इस्तीफा देने के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि, दोनों नेताओं की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि हालिया तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एमडीएमके ने द्रमुक गठबंधन के तहत 'उदय सूरियन' (उगते सूरज) चुनाव चिह्न पर चार सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनमें से कडैयनल्लूर और सीरकाझी सीटों पर पार्टी ने जीत दर्ज की थी। ऐसे में गठबंधन टूटने के बाद इन विधायकों की आगे की राजनीतिक भूमिका पर भी नजर रहेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एमडीएमके के इस फैसले से विपक्षी दलों के बीच नए गठबंधन बनने की संभावनाएं बढ़ेंगी और आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल सकती है।

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लेखक के बारे में

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हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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