नेपाल ने रचा इतिहास, भारत-बांग्लादेश में बिजली निर्यात से 18.76 अरब का शुद्ध लाभ
घरेलू उत्पादन बढ़ने और अच्छी वर्षा से निर्यात में वृद्धि
काठमांडू। नेपाल विद्युत प्राधिकरण ने पिछले वित्तीय वर्ष में पहली बार पूरे 12 महीनों तक बिजली का निर्यात किया। इस दौरान नेपाल ने 29 अरब 32 करोड़ 47 लाख रुपये की बिजली भारत और बांग्लादेश को निर्यात की।
आयात पर केवल 10 अरब 56 करोड़ रुपये खर्च हुए। इससे नेपाल को 18 अरब 76 करोड़ 50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
ये खबर भी पढ़े : इज़राइल-हिज़्बुल्लाह संघर्ष विराम लागू कराने में अमेरिका की पहल, बेरूत दौरे की संभावनाघरेलू बिजली उत्पादन में वृद्धि और मार्च–अप्रैल के दौरान भी अच्छी वर्षा होने से भारत और बांग्लादेश को बिजली निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई, जबकि भारत से बिजली आयात में कमी दर्ज की गई।
प्राधिकरण के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2०२४/२५ में बिजली व्यापार से केवल 4 अरब 54 करोड़ 80 लाख रुपये का व्यापार अधिशेष था, जो पिछले वर्ष २०२५/२६ में लगभग चार गुना बढ़ गया।
बीते वित्तीय वर्ष में नेपाल ने भारत और बांग्लादेश को कुल 3 अरब 87 करोड़ 74 लाख 92 हजार यूनिट बिजली निर्यात कर 29 अरब 32 करोड़ 47 लाख 43 हजार रुपये की आय अर्जित की।
यह आय वित्तीय वर्ष 2081/82 में हुई 17 अरब 47 करोड़ 10 लाख रुपये की कमाई की तुलना में 67.84 प्रतिशत अधिक है नेपाल विद्युत प्राधिकरण वर्तमान में वर्षा ऋतु के दौरान भारत को 1,000 मेगावाट से अधिक और बांग्लादेश को 40 मेगावाट बिजली निर्यात कर रहा है।
नेपाल की अधिकांश जलविद्युत परियोजनाएं 'रन-ऑफ-द-रिवर' (आरओआर) प्रणाली पर आधारित हैं। पहले सामान्यतः मई के अंत से दिसंबर के पहले सप्ताह तक ही बिजली निर्यात संभव हो पाता था।
लेकिन पिछले वर्ष चैत और बैसाख जैसे ऑफ-सीजन में भी अच्छी वर्षा होने से बिजली उत्पादन बढ़ा और नेपाल पूरे वर्ष बिजली निर्यात करने में सफल रहा।
प्राधिकरण के प्रवक्ता राजन ढकाल के अनुसार, नेपाल में हर वर्ष 500 से 600 मेगावाट नई बिजली उत्पादन क्षमता जुड़ रही है। घरेलू खपत के बाद बची हुई बिजली का निर्यात लगातार बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में भी यह रुझान जारी रहने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा, "नेपाल में घरेलू आवश्यकता पूरी करने के बाद बची हुई बिजली का निर्यात किया जाता है। हर वर्ष 500 से 600 मेगावाट नई क्षमता जुड़ने से निर्यात बढ़ा है और इसके साथ ही निर्यात से होने वाली आय में भी लगातार वृद्धि हो रही है।"
नेपाल की अधिकांश जलविद्युत परियोजनाएं नदी प्रवाह पर आधारित हैं। मानसून के दौरान नदियों में जलस्तर बढ़ने से बिजली उत्पादन अधिक होता है, इसलिए इसी अवधि में बिजली निर्यात भी सबसे ज्यादा होता है। वहीं सर्दियों में जलस्तर घटने से उत्पादन कम हो जाता है और घरेलू मांग पूरी करने के लिए भारत से बिजली आयात करनी पड़ती है।
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