हरियाली संरक्षण पर संदेश, पृथ्वी गिफ्ट देती है, हम रिटर्न गिफ्ट दें : मांगें राम चौहान
पृथ्वी हमारी माता है। वह बिना किसी शर्त के हमें अनगिनत उपहार देती रहती है-स्वच्छ हवा, मीठा जल, उपजाऊ मिट्टी, रंग-बिरंगे फल-फूल, औषधीय जड़ी-बूटियाँ, खनिज संपदा और अनुपम प्राकृतिक सौंदर्य। यह सब उसके निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है। लेकिन विडंबना यह है कि हम उसके इन उपहारों को लगातार लेते जा रहे हैं, बदले में उसे कुछ लौटाने की जिम्मेदारी भूलते जा रहे हैं।
प्रकृति का अपना संतुलन है। पेड़ हमें प्राणवायु देते हैं, मिट्टी हमें अन्न देती है, नदियाँ जीवनदायिनी जल देती हैं, और मधुमक्खियाँ परागण कर हमारी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। यह एक ऐसा प्राकृतिक आदान-प्रदान है, जिसमें हर जीव अपनी भूमिका निभाता है। लेकिन आधुनिक जीवनशैली ने इस संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। जंगलों की कटाई, नदियों का प्रदूषण, मिट्टी में रासायनिक जहर और प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग पृथ्वी को कमजोर कर रहा है।
आज जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़, बढ़ता तापमान और जैव विविधता का ह्रास इसी असंतुलन के परिणाम हैं। पृथ्वी जब थकती है, तो वह चेतावनी देती है—सूखते जलस्रोतों, घटती हरियाली और विलुप्त होती प्रजातियों के माध्यम से। यह चेतावनी केवल प्रकृति के लिए नहीं, मानव सभ्यता के भविष्य के लिए भी है।
पृथ्वी को “रिटर्न गिफ्ट” देना कोई कठिन काम नहीं है। यह छोटी-छोटी आदतों से शुरू होता है। एक पौधा लगाना और उसकी देखभाल करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, जल संरक्षण करना, जैविक खेती को अपनाना, ऊर्जा की बचत करना और कचरे का सही प्रबंधन करना—ये सभी पृथ्वी के प्रति हमारी कृतज्ञता के सरल लेकिन प्रभावी तरीके हैं।
ये खबर भी पढ़े : मांगें राम चौहान ने प्रकृति संरक्षण पर दिया संदेश, बोले प्रकृति परिवार है, संपत्ति नहींभारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति सम्मान की परंपरा सदियों पुरानी है। हम धरती को माता मानते हैं, नदियों को पूजते हैं, वृक्षों को देवता का स्वरूप समझते हैं और पशु-पक्षियों के प्रति दया का भाव रखते हैं। आदिवासी समाज आज भी प्रकृति से उतना ही लेते हैं जितनी आवश्यकता हो, और बदले में उसकी रक्षा करते हैं। यह संतुलित जीवनशैली आज पूरे समाज के लिए प्रेरणा है।
हमें अपनी जीवनशैली में कुछ प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव लाने होंगे। हर जन्मदिन पर एक पेड़ लगाना, हर त्योहार पर पौधारोपण करना, बच्चों को प्रकृति प्रेम का संस्कार देना और पर्यावरण दिवस को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संकल्प दिवस बनाना-यही सच्चे रिटर्न गिफ्ट हैं।
पृथ्वी हमारा घर है, हमारा भंडार नहीं। यदि हम इसे संजोएंगे, तो यह हमें और अधिक समृद्धि, शुद्धता और जीवन का आनंद देगी। स्वच्छ हवा, निर्मल जल, हरियाली और जैव विविधता से भरा संसार ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा उपहार होगा। अंततः, पृथ्वी हमें प्रतिदिन गिफ्ट देती है। अब हमारी बारी है कि हम उसे प्रेम, संरक्षण, सम्मान और कृतज्ञता का रिटर्न गिफ्ट दें। यही मानवता का धर्म है और भविष्य की सुरक्षा का आधार भी।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
