संतरे का बाग लगाकर किसान हर साल कमा सकते हैं लाखों का मुनाफा
संतरे की खेती :देश में पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब बागवानी की तरफ भी किसानों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है. इसी कड़ी में संतरे यानी ऑरेंज की खेती एक ऐसा विकल्प है, जो कम जमीन में भी अच्छी कमाई का जरिया बन सकती है. नींबू प्रजाति के फलों में संतरे का स्थान सबसे ऊपर माना जाता है और देश में आम के बाद फलों की पैदावार में भी इसका महत्वपूर्ण स्थान है. अगर सही तरीके से खेती की जाए, तो सिर्फ एक एकड़ जमीन से भी किसान हर साल अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
किन राज्यों में होती है संतरे की खेती
भारत में संतरे की खेती मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में की जाती है. संतरे का पौधा गर्मी और सर्दी दोनों मौसम को अच्छी तरह सहन कर सकता है, यही वजह है कि पठारी और मैदानी दोनों तरह के इलाकों में इसकी खेती लोकप्रिय है.
मिट्टी और जलवायु का रखें ध्यान
संतरे की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली गहरी दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 8 के बीच होना चाहिए और उसमें कंकड़-पत्थर या कठोरता नहीं होनी चाहिए. खेत की तैयारी के लिए दो-तीन बार जुताई कर मिट्टी को समतल कर लेना चाहिए.
पौधों के बीच रखें सही दूरी
संतरे के पौधे रोपने के लिए 15 से 18 फीट की दूरी पर एक मीटर चौड़े और गहरे गड्ढे बनाए जाते हैं, जिनमें खाद और मिट्टी का मिश्रण भरा जाता है. एक एकड़ खेत में आमतौर पर करीब 100 पौधे लगाए जा सकते हैं. सही दूरी बनाए रखने से पौधों को धूप और पोषक तत्व अच्छी तरह मिलते हैं, जिससे उनकी बढ़वार भी बेहतर होती है.
कितनी मिलती है पैदावार
एक पूरी तरह विकसित संतरे के पौधे से सालाना करीब 100 से 150 किलोग्राम तक फल मिल सकते हैं. इस हिसाब से एक एकड़ खेत से किसान करीब 10 हजार से 15 हजार किलोग्राम तक संतरे की उपज हासिल कर सकते हैं. हालांकि यह पैदावार पौधों की देखरेख, सिंचाई और खाद-पानी की व्यवस्था पर काफी हद तक निर्भर करती है.
कितना हो सकता है मुनाफा
बाजार में संतरे का थोक भाव आमतौर पर 20 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रहता है. इस हिसाब से एक एकड़ में संतरे की खेती से किसान सालाना करीब 1 लाख 50 हजार रुपये से लेकर 4 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. हालांकि यह मुनाफा बाजार भाव, फसल की गुणवत्ता और सही समय पर बिक्री जैसी बातों पर भी निर्भर करता है.
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लेखक के बारे में
सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।
