बाग में कैसे उगा सकते हैं तोतापरी मैंगो? सीजन में होगा बंपर मुनाफा
तोतापरी आम की बागवानी : अगर आप अपने फार्म हाउस या खेत से अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो तोतापरी आम की खेती एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है. तोतापरी आम अपनी तोते की चोंच जैसी बनावट की वजह से पहचाना जाता है. इसे कई जगहों पर किली मुक्कू के नाम से भी जाना जाता है. यह आम की ऐसी किस्म का आम है जो ज्यादा पैदावार देने के लिए मशहूर है और इसकी देखभाल भी आसान होती है. आज के समय में जब पल्प इंडस्ट्री और एक्सपोर्ट की डिमांड बढ़ रही है. ऐसे में तोतापरी उगाकर किसान भाई मोटी कमाई कर सकते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर साल फल देता है और बाकी दूसरी वैरायटी के मुकाबले बीमारियों के प्रति ज्यादा रेजिस्टेंट है जिससे किसानों का रिस्क काफी कम हो जाता है. जान लीजिए इसे उगाने का सही तरीका.
तोतापरी आम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर साल अच्छी मात्रा में फल देता है साथ ही, यह कई बीमारियों का सामना दूसरी किस्मों के मुकाबले बेहतर तरीके से कर लेता है, जिससे किसानों को नुकसान का खतरा कम रहता है. सही तरीके से इसकी बागवानी करके किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं. आइए जानते हैं इसे उगाने का सही तरीका.
ऐसे उगाएं तोतापरी आम
तोतापरी आम की खेती शुरू करने से पहले सही जमीन और मौसम का चुनाव करना बहुत जरूरी है. यह आम की किस्म गर्म और हल्के गर्म मौसम वाले इलाकों में अच्छी तरह बढ़ती है. इसके लिए 21 से 27 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है. मिट्टी की बात करें तो अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए सबसे बेहतर रहती है. पौधे लगाने के लिए करीब 1 मीटर गहरा और 1 मीटर चौड़ा गड्ढा तैयार करें. इसके बाद गड्ढे में मिट्टी और सड़ी हुई गोबर की खाद का मिश्रण भर दें. तोतापरी आम के पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय मानसून का मौसम होता है. जून से अगस्त के बीच पौधारोपण करने से पौधों को पर्याप्त नमी मिलती है और उनकी जड़ें अच्छी तरह विकसित हो पाती हैं.
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इस तरीके से लगाएं पेड़
आजकल फार्म हाउस में अल्ट्रा हाई डेंसिटी प्लांटिंग का चलन बढ़ा है जिससे कम जगह में ज्यादा पेड़ लगाए जा सकते हैं. पारंपरिक तरीके में जहां पेड़ 10-10 मीटर की दूरी पर लगते थे. वहीं मॉडर्न तकनीक में आप 3x2 मीटर की दूरी पर भी इन्हें लगा सकते हैं.
समय पर करें सिंचाई
सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन यानी टपक सिंचाई सबसे बेस्ट है. जो पानी बचाने के साथ-साथ पौधों को जरूरी नमी भी प्रदान करती है. छोटे पौधों को शुरुआत में हर 2-3 दिन में पानी देना चाहिए. जबकि बड़े पेड़ों को फल आने के समय नमी की ज्यादा जरूरत होती है. नियमित कटाई-छंटाई से पेड़ों का शेप सही रहता है और फलों की क्वालिटी सुधरती है.
तोतापरी आम की खेती से कितनी हो सकती है कमाई?
तोतापरी आम की खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का जरिया बन सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह आम की दूसरी कई किस्मों की तुलना में ज्यादा फल देता है. एक बड़ा और पूरी तरह तैयार पेड़ सालभर में लगभग 150 से 250 किलो तक आम पैदा कर सकता है. साथ ही बाजार में इसकी मांग सिर्फ खाने के लिए ही नहीं होती, बल्कि जूस, मैंगो शेक, जैम और आम का पल्प बनाने वाली कंपनियां भी इसे बड़े पैमाने पर खरीदती हैं. इस आम में गूदा ज्यादा होता है और गुठली छोटी होती है, इसलिए फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में इसकी काफी मांग रहती है.
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लेखक के बारे में
सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।
