तीन पीढ़ियों से न्याय की मिसाल: माथुर परिवार की वकालत की 76 वर्षों से अधिक की गौरवशाली विरासत
वरिष्ठ अधिवक्ता तरित माथुर की लगभग 40वर्षों की सशक्त वकालत, पिता और पुत्रों ने भी न्यायिक सेवा की परंपरा को दिया नया आयाम
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बदायूं। शहर में यदि वकालत की समृद्ध परंपरा और न्याय के प्रति समर्पण की बात की जाए तो माथुर परिवार का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। तीन पीढ़ियों से यह परिवार न्यायपालिका और विधि सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। वरिष्ठ अधिवक्ता तरित माथुर ने वर्ष 1986 में वकालत की शुरुआत की और लगभग 40 वर्षों से अधिक समय से फौजदारी मामलों में अपनी प्रभावशाली पैरवी के लिए जाने जाते हैं। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने एक वर्ष तक आयकर (इनकम टैक्स) संबंधी मामलों में भी कार्य किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता तरित माथुर ने दिल्ली से बीएससी एवं एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने पब्लिक स्पीकिंग और रूसी (रशियन) भाषा का भी अध्ययन किया। एलएलबी के दौरान उन्होंने क्रिमिनोलॉजी तथा लेबर लॉ में विशेष योग्यता प्राप्त की, जिसने उनके विधिक ज्ञान को और अधिक समृद्ध बनाया।
सामाजिक क्षेत्र में भी तरित माथुर का योगदान उल्लेखनीय रहा है। वह रोटरी क्लब के अध्यक्ष एवं असिस्टेंट गवर्नर रह चुके हैं। पोलियो उन्मूलन अभियान के अंतर्गत उन्होंने अनेक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराए। इसके अलावा बदायूं क्लब में लगभग आठ वर्षों तक कार्यवाहक सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। बदायूं महोत्सवों में भी उनकी सक्रिय महत्व पूर्ण भूमिका रही है
अपने विधिक जीवन में उन्होंने कई चर्चित मामलों में प्रभावी पैरवी की। कटरा सहादतगंज प्रकरण में बचाव पक्ष की ओर से पैरवी की। एचपीसीएल से जुड़े मामले में कंपनी की ओर से पक्ष रखा। वहीं वितरोई ट्रेन लूट कांड में वादी पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए दोषियों को फांसी की सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त बाबा कॉलोनी में बच्चों की हत्या के चर्चित मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत कराने में भी अहम योगदान दिया।
माथुर परिवार की न्यायिक विरासत की नींव स्वर्गीय कैलाश चंद्र माथुर ने रखी। उन्होंने लगभग 40 वर्षों तक वकालत की और 14 वर्षों तक सरकारी वकील के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उनके अनुभव और ईमानदार कार्यशैली ने परिवार को न्याय के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान दिलाई।
इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए तरित माथुर के भाई अधिवक्ता रविन्द्र माथुर ने वर्ष 1994 में वकालत शुरू की। वह करीब 32 वर्षों से विधि सेवा में सक्रिय हैं और सहायक सरकारी वकील के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
नई पीढ़ी भी इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ा रही है। तरित माथुर के बड़े पुत्र अधिवक्ता जयंत माथुर पिछले आठ वर्षों से अधिक से र्किमिनल क्षेत्र में वकालत कर रहे हैं और साइबर लॉ तथा कॉर्पोरेट लॉ के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वहीं छोटे पुत्र शिखर माथुर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में फोरेंसिक अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं व विभिन्न अभिकरण जैसे केंद्रिय जांच ब्यूरो(CBI) तथा राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA)को भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
लगातार तीन पीढ़ियों से न्याय व्यवस्था, समाज सेवा और विधि के क्षेत्र में सक्रिय योगदान देने वाला माथुर परिवार बदायूं की उन चुनिंदा विधिक परंपराओं में शामिल है, जिसने अपने ज्ञान, अनुभव और ईमानदार कार्यशैली के बल पर समाज में एक सम्मानजनक स्थान बनाया है। यह परिवार आज भी न्याय, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की उसी परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहा है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले शारिक नसीर वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के बदायूं ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ और तथ्यपरक कवरेज के साथ वह लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
