चीन का 'रूफटॉप रेन' कूलिंग सिस्टम क्या है? बिना AC के गर्मी कम करने वाली तकनीक क्यों हो रही वायरल?
China Rooftop Rain Cooling System चर्चा में है। जानिए यह तकनीक कैसे काम करती है और क्या भारत में भी इसे अपनाया जा सकता है।
- यह तकनीक वाष्पीकरण (Evaporative Cooling) के सिद्धांत पर काम करती है।
- दावा है कि इससे आसपास का तापमान 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक कम हो सकता है।
- भारत के कुछ गर्म और शुष्क इलाकों में इसका इस्तेमाल संभव माना जा रहा है।
नई दिल्ली: एशिया में पड़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच चीन की एक नई कूलिंग तकनीक सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वायरल वीडियो में ऊंची इमारतों की छतों से बारिश जैसी महीन फुहार निकलती दिखाई देती है, जिसे Rooftop Rain Cooling System कहा जा रहा है।
यह कृत्रिम बारिश नहीं है, बल्कि पानी की बेहद महीन बूंदों के जरिए आसपास की गर्मी कम करने वाली तकनीक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका मकसद इमारतों और खुले इलाकों का तापमान कम करना है, न कि कमरे के अंदर की हवा को ठंडा करना।
ये खबर भी पढ़े : पायरेटेड फिल्में और OTT कंटेंट पर भी सख्त हुई सरकार, टेलीग्राम को भेजा नोटिस; 15 दिन में मांगा जवाबरूफटॉप रेन कूलिंग सिस्टम क्या है?
इस तकनीक में इमारतों की छत पर हाई-प्रेशर मिस्टिंग नोजल लगाए जाते हैं। तापमान बढ़ने पर ये नोजल हवा में बेहद बारीक पानी की बूंदें छोड़ते हैं, जो जमीन तक पहुंचने से पहले ही वाष्प बन जाती हैं।
इस प्रक्रिया को Evaporative Cooling (वाष्पीकरण आधारित शीतलन) कहा जाता है। जब पानी वाष्प में बदलता है, तो वह आसपास की गर्मी को अवशोषित करता है, जिससे वातावरण का तापमान कुछ हद तक कम महसूस होता है।
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यह तकनीक कितनी असरदार है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि मौसम अनुकूल हो और हवा में नमी कम हो, तो यह तकनीक आसपास का तापमान 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक कम करने में मदद कर सकती है। हालांकि इसका असर हर जगह एक जैसा नहीं होता।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक खुले स्थानों, फैक्ट्रियों, व्यावसायिक परिसरों और सार्वजनिक जगहों पर अधिक उपयोगी हो सकती है, जहां बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं।
क्या यह एयर कंडीशनर का विकल्प है?
इसका जवाब नहीं है। एयर कंडीशनर बंद कमरे के अंदर की हवा को ठंडा करता है, जबकि Rooftop Rain Cooling System केवल बाहरी वातावरण को कुछ हद तक ठंडा करने का काम करता है।
हालांकि इसकी बिजली की खपत अपेक्षाकृत कम हो सकती है। यही वजह है कि इसे ऊर्जा बचाने वाली सहायक तकनीक के रूप में देखा जा रहा है, न कि AC के विकल्प के तौर पर।
क्या भारत में भी अपनाई जा सकती है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत के गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क इलाकों में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। लेकिन इसे बड़े स्तर पर लागू करने से पहले पानी की उपलब्धता, रखरखाव और स्थानीय मौसम का आकलन करना जरूरी होगा अधिक नमी वाले राज्यों में इसकी प्रभावशीलता कम हो सकती है, क्योंकि वहां पानी तेजी से वाष्पित नहीं हो पाता। इसलिए हर शहर के लिए इसकी उपयोगिता अलग-अलग हो सकती है।
चीन का Rooftop Rain Cooling System बढ़ती गर्मी से निपटने की दिशा में एक नई पहल है। हालांकि यह एयर कंडीशनर की जगह नहीं ले सकता, लेकिन शहरी इलाकों में तापमान कम करने और हीटवेव के असर को घटाने में मददगार साबित हो सकता है।
अगर पानी और स्थानीय मौसम जैसी चुनौतियों का समाधान निकाला जाए, तो भविष्य में भारत समेत कई देश भी इस तकनीक को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।
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लेखक के बारे में
गर्गी विश्वकर्मा वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़ी हैं और डिजिटल डिप्टी चीफ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। वह डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्पष्ट, तथ्यपरक और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करती हैं।
