11वें दिन भी भूख हड़ताल पर डटे सोनम वांगचुक, 7 किलो से ज्यादा वजन घटा; क्या हैं आंदोलन की मांगें?
Sonam Wangchuk Hunger Strike का आज 11वां दिन है। जानिए उनकी सेहत कैसी है, आंदोलन की प्रमुख मांगें क्या हैं और अब तक क्या हुआ।
- सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 11वें दिन में पहुंची, 7 किलो से ज्यादा वजन घटा।
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और NTA में सुधार की मांग।
- NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर छात्र और किसान संगठन भी आंदोलन के समर्थन में
नई दिल्ली: शिक्षा व्यवस्था में सुधार और NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल बुधवार को 11वें दिन में प्रवेश कर गई। यह प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा है, जबकि आंदोलन का कुल 19वां दिन है।
आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार प्रमुख मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
कैसी है सोनम वांगचुक की सेहत?
आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, 11वें दिन सोनम वांगचुक का ब्लड प्रेशर 103/78, ब्लड शुगर 75 mg/dL दर्ज किया गया। बताया गया है कि उनका 7 किलो से अधिक वजन कम हो चुका है। हालांकि, उनकी शारीरिक कमजोरी बढ़ी है, लेकिन समर्थकों का कहना है कि वह मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क हैं और आंदोलन जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें?
प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक होने से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
इसके अलावा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में व्यापक सुधार या उसे समाप्त कर नई व्यवस्था बनाने की मांग की जा रही है। आंदोलनकारी उन छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की भी मांग कर रहे हैं, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा से जुड़े तनाव या अनियमितताओं के कारण आत्महत्या की।
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NEET-UG 2026 विवाद क्या है?
इस आंदोलन की शुरुआत NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक के बाद हुई। आरोपों के बीच मई में हुई परीक्षा रद्द कर दी गई थी और बाद में 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई। हालांकि सरकार ने जांच और दोबारा परीक्षा जैसे कदम उठाए, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल री-एग्जाम से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका मानना है कि पूरी परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही तय करना जरूरी है।
कौन-कौन कर रहा है समर्थन?
इस आंदोलन को कई छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसान संगठनों का समर्थन मिला है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) पहले ही अपना समर्थन जता चुका है। जंतर-मंतर पर रोजाना छात्र, युवा और सामाजिक संगठन पहुंच रहे हैं। आंदोलनकारी इसे केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि देश की पूरी प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था में सुधार की लड़ाई बता रहे हैं।
सरकार की क्या प्रतिक्रिया है?
अब तक केंद्र सरकार की ओर से आंदोलन की प्रमुख मांगों पर कोई नई घोषणा या बड़ा फैसला सामने नहीं आया है। प्रदर्शनकारी लगातार सरकार से संवाद और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, सोनम वांगचुक ने संकेत दिए हैं कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
लेखक के बारे में
गर्गी विश्वकर्मा वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़ी हैं और डिजिटल डिप्टी चीफ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। वह डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्पष्ट, तथ्यपरक और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करती हैं।
