Iron Air Battery: स्लो चार्ज होने वाली बैटरी में भारतीय कंपनी ने फूंकी जान
नई दिल्ली। Imoproved Iron Air Battery: समय के साथ दुनिया को रिन्यूएबल एनर्जी की एहमियत का अंदाजा हुआ है और इसी के साथ बिजली को सुरक्षित तरीके से स्टोर करने के तरीकों की मांग भी बढ़ी है। इस बीच भारत के चेन्नई से एक डीप टेक स्टार्टअप ने एक ऐसा आयरन एयर बैटरी सिस्टम बनाया है, जो बेहद तेजी से चार्ज होता है और लंबे समय तक बिजली को स्टोर करके रख सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह तकनीक आने वाले समय में बिजली के संकट को दूर कर सकती है। दरअसल इस तकनीक का इस्तेमाल लंबे समय के लिए बिजली स्टोर करने में गेम चेंजर साबित हो सकता है। नई तकनीक को बनाने वाले स्टार्टअप का नाम Meine Electric है।
क्या है और कैसे काम करती है आयरन एयर बैटरी?
ऐसा नहीं है कि आयरन एयर बैटरी बिल्कुल अनोखी तकनीक है लेकिन पारंपरिक आयरन एयर बैटरी को चार्ज होने में काफी समय लगता है।
ये खबर भी पढ़े : लेक्सस ES 350h ने भारत में रखा कदम, इसके स्मार्ट टेक्नोलॉजी और फीचर्स के लोग है दीवानेयही वजह थी कि इन बैटरियों को रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल करना संभव नहीं था।
इस समस्या को सुलझाते हुए Meine Electric ने खास तकनीक बनाई है, जिसे FCLD यानी कि फास्ट चार्ज लॉन्ग डिस्चार्ज नाम दिया गया है।
इस स्टार्टअप की तकनीक के चलते आयरन एयर बैटरी को सिर्फ 6 घंटे में चार्ज किया जा सकता है। इतना ही नहीं इस स्टार्टअप की बनाई तकनीक के चलते इन बैटरियों को डिस्चार्ज होने में भी 18 घंटे लगते हैं। आसान भाषा में कहें, तो यह बैटरी जल्दी चार्ज हो सकती हैं और लंबे समय तक बिजली को होल्ड कर सकती हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय स्टार्टअप के इस दावे की पुष्टि अमेरिका की प्रतिष्ठित ग्लोबल एनर्जी सर्विसेज कंपनी कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस (CES) ने भी अपनी जांच में भी की है।
क्यों खास है नई तकनीक?
इस कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ प्रियांश मोहन के मुताबिक, अभी तक पुराने सिस्टम सौर उर्जा से इसलिए तालमेल नहीं बिठा पाते थे क्योंकि सौर ऊर्जा सिर्फ दिन के 6 से 8 घंटे ही मिलती है।
ऐसे में बिजली ग्रिड को ऐसी बैटरी की जरूरत पड़ती है जो कई सौ घंटों में नहीं बल्कि 6 से 8 घंटे में चार्ज हो सके।
Meine Electric की नई तकनीक ने आयरन-बैटरी टेक्नोलॉजी को एक सुस्त बैकअप से बदलकर ऐसी टेक्नोलॉजी बना दिया है, जो दिन में चार्ज होकर पूरी रात बिजली दे सकती है।
साल 2023 में शुरू हुआ ये स्टार्टअप पूरे एशिया-पैसिफिक में इस तकनीक पर काम करने वाली पहली कंपनी बन गई है।
वहीं, अगर बात पूरी दुनिया की हो, तो इस क्षेत्र में काम करने वाला भारत तीसरा ही प्लेयर है, जिसने इस एडवांस टेक्नोलॉजी में महारत हासिल की है।
आयरन-एयर बैटरी तकनीक
इस कंपनी के को-फाउंडर और सीओओ स्तुति कक्कड़ का कहना है कि आयरन-एयर तकनीक लिथियम से काफी सस्ती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें महंगे लिथियम की जगह लोहे जैसी सस्ती धातु का इस्तेमाल हो सकता है।
इसके अलावा रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह बैटरी तकनीक पूरी तरह सुरक्षित भी है और इसमें लिथियम बैटरियों की तरह आग लगने या ब्लास्ट होने का कोई खतरा नहीं रहता।
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