₹13,000 करोड़ की विजिंजम पोर्ट डील में क्या है कानूनी पेंच? जानिए SEBI और केरल सरकार की भूमिका
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। केरल के विजिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह में अडानी पोर्ट्स की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी दुनिया की सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग कंपनी MSC (मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी ) की सहयोगी कंपनी को बेचने का प्रस्ताव अब कानूनी और नियामकीय बहस का विषय बन गया है। विपक्ष के नेता पिनराई विजयन द्वारा SEBI से जांच की मांग के बाद इस सौदे पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) ने 29 जून को बताया था कि वह विजिंजम पोर्ट का संचालन करने वाली कंपनी अडानी विझिनजम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (AVPPL) में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में है। प्रस्तावित सौदे की कीमत करीब 1.4 अरब डॉलर (लगभग 13,000 करोड़ रुपये) है।
हालांकि, केरल सरकार का कहना है कि कन्सेशन एग्रीमेंट के अनुसार 25 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सेदारी के हस्तांतरण के लिए राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी आवश्यक है। सरकार का दावा है कि उससे पहले इस संबंध में अनुमति नहीं मांगी गई।
SEBI की भूमिका क्या होगी?
पिनराई विजयन ने SEBI से शिकायत कर इस पूरे मामले की जांच की मांग की है। यदि नियामकीय नियमों के उल्लंघन की आशंका होती है, तो SEBI कंपनी से स्पष्टीकरण मांग सकती है और आवश्यक कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, हिस्सेदारी हस्तांतरण को अंतिम मंजूरी देना केवल SEBI के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। इसमें कन्सेशन एग्रीमेंट और अन्य सरकारी मंजूरियां भी अहम भूमिका निभाती हैं।
आगे क्या हो सकता है?
अडानी पोर्ट्स का कहना है कि यह सौदा सभी आवश्यक मंजूरियों के अधीन है। वहीं, यदि राज्य सरकार और कंपनी के बीच सहमति नहीं बनती, तो मामला कन्सेशन एग्रीमेंट के तहत सुलह या मध्यस्थता तक पहुंच सकता है।
फिलहाल SEBI या केरल सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह बहुचर्चित पोर्ट डील आगे बढ़ती है या कानूनी प्रक्रिया में उलझती है।
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गर्गी विश्वकर्मा वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़ी हैं और डिजिटल डिप्टी चीफ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। वह डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्पष्ट, तथ्यपरक और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करती हैं।
