यूपी में EV की बढ़ती संख्या से बिजली व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
रात में 2,000 MW तक बढ़ रही मांग
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की तेजी से बढ़ती संख्या अब बिजली व्यवस्था के लिए नई चुनौती बनती जा रही है। बिजली विभाग के अनुसार, रात के समय इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग से करीब 2,000 मेगावाट अतिरिक्त पीक लोड बढ़ रहा है। यही वह समय होता है जब घरों में एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य बिजली उपकरण भी अधिक इस्तेमाल किए जाते हैं।
प्रदेश में इस समय 15 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें सबसे बड़ी संख्या ई-रिक्शा की है। दिनभर चलने के बाद अधिकांश ई-रिक्शा रात में चार्ज होते हैं, जिससे रात 9 बजे से आधी रात के बीच बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है। इस दौरान प्रदेश की कुल पीक बिजली मांग करीब 32,000 मेगावाट तक पहुंच रही है।
अनधिकृत चार्जिंग भी बनी बड़ी समस्या
बिजली विभाग का कहना है कि बड़ी संख्या में ई-रिक्शा घरेलू बिजली कनेक्शन या अवैध चार्जिंग सेंटरों से चार्ज किए जा रहे हैं। इससे ट्रांसफॉर्मरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, बार-बार फॉल्ट आते हैं और विभाग को राजस्व का भी नुकसान होता है।
विभाग के अनुसार, केवल लखनऊ में करीब 30 हजार ई-रिक्शा घरेलू कनेक्शन से चार्ज किए जा रहे हैं, जिससे हर महीने लाखों यूनिट अतिरिक्त बिजली की खपत हो रही है।
तेजी से बढ़ रहा EV लोड
यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के आंकड़ों के मुताबिक, स्वीकृत EV लोड लगातार बढ़ रहा है। 2024-25 में यह 76,376 किलोवाट था, जो 2025-26 में बढ़कर 1,23,009 किलोवाट और 2026-27 में 1,83,779 किलोवाट तक पहुंच गया। यानी एक साल में करीब 61 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सरकार की क्या है तैयारी?
बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क तेजी से बढ़ा रही है। प्रदेश में अब 2,400 से अधिक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हैं। इसके साथ ही ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाने, स्मार्ट ग्रिड तकनीक अपनाने और भविष्य में अलग EV चार्जिंग फीडर विकसित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय के अनुसार अलग-अलग बिजली दरें (Time-of-Day Tariff) लागू करने और सौर ऊर्जा आधारित चार्जिंग को बढ़ावा देने से रात के पीक लोड को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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गर्गी विश्वकर्मा वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़ी हैं और डिजिटल डिप्टी चीफ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। वह डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्पष्ट, तथ्यपरक और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करती हैं।
