हे राम! 13 साल की नाबालिग बच्ची चार होटल और 30 दरिंदे!
मनोज कुमार अग्रवाल
राजस्थान के श्रीगंगानगर में उस समय बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ अभियान व नारी सशक्तिकरण के तमाम नारे धूल धुसरित हो गए जब एक तेरह साल की नाबालिग बच्ची को चार होटलों में ले जाकर तीस से अधिक नर पिचाश दरिंदों ने बेरहमी से दरिंदगी की। जहां एक शर्मनाक और खौफनाक वारदात ने इंसानियत और कानून व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. महज 13 साल की एक बच्ची के साथ ऐसी हैवानियत की गई, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया. इस घिनौनी वारदात के सामने आने के बाद पूरे जिले में गुस्सा फूट पड़ा और लोग सड़कों पर उतर आए हैं. पुलिस प्रशासन, संगठित अपराधियों और अवैध होटलों के नेटवर्क को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं. मगर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उस मासूम को इंसाफ मिल पाएगा?
आपको बता दें 18 जून 2026 के दिन जब इस खौफनाक कहानी की शुरुआत हुई. पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, 13 साल की पीड़ित बच्ची अपनी एक सहेली से मिलने श्रीविजयनगर गई थी. परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द घर लौट आएगी, लेकिन अचानक घरवालों से उसका संपर्क टूट गया. और वो लौटकर घर नहीं आई. उसे तलाश किया गया, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला. उसकी कोई खबर ना मिलने से घरवालों की चिंता बढ़ती गई और कुछ ही घंटों में यह मामला एक रहस्यमय गुमशुदगी में बदल गया.घरवाले पुलिस के पास पहुंचे. मदद की गुहार लगाई. तहरीर लेने के बाद पुलिस हरकत में आ गई. पुलिस जांच के मुताबिक, उसी रात बच्ची श्रीगंगानगर पहुंची थी और घर जाने के लिए एक ई-रिक्शा में बैठी. शैतान की एंट्री - आरोप है कि उसी दौरान रामबाबू नाम का एक ई-रिक्शा चालक उसे मिल गया. उसने बच्ची को बातों ही बातों में विश्वास में ले लिया और उसे घर छोड़ने का भरोसा दिया. लड़की उसके साथ ई रिक्शा में बैठ गई. उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि अगले कुछ मिनटों में उसके साथ क्या होने वाला है. रामबाबू उसे घर पहुंचाने के बजाय एक होटल में ले गया. जहां उसने लड़की को होटल संचालक के हवाले कर दिया. बताया जा रहा है कि इसके बदले उसे अच्छे खासे पैसे मिले. अब वो मासूम बच्ची ऐसे जाल में फंस चुकी थी, जहां से निकलना उसके लिए नामुमकिन सा हो गया था.इस मामले की तफ्तीश में जुटी पुलिस बताती है कि जांच में सामने आया कि बच्ची को सबसे पहले 'होटल जॉय इन' ले जाया गया था. इसके बाद अगले कई दिनों तक उसे एक होटल से दूसरे होटल में ले जाया जाता रहा. शुरुआती जांच में तीन होटलों की जानकारी पुलिस को मिली थी, लेकिन बाद में बीरबल चौक के पास मौजूद 'ड्रीम' नाम के चौथे होटल का भी पता चला. पुलिस के अनुसार, एक बाद एक इन सभी होटलों में बच्ची को छिपाकर रखा गया था. और वहीं उसकी आबरू लूटी गई.
जिस्म का धंधा - आरोप है कि होटल मालिकों और मैनेजरों ने पांच दिनों के भीतर उस मासूम बच्ची को 30 से ज्यादा लोगों के सामने परोसा किया. आरोपों के मुताबिक, दिन के समय भी कई कई लोग उसके साथ रेप करते थे. कहा जाए तो उसके साथ लगातार गैंग रेप किया गया. दरिदों ने मौका मिलते ही उसके साथ दरिंदगी की. मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब दरिंदगी के दौरान वो बच्ची दर्द से तड़पती थी, तब उसे शांत करने और सुलाने के लिए जबरन उसे शराब पिलाई जाती थी. और फिर उसकी इज्जत को तार तार किया जाता था. बताया जा रहा है कि होटल मालिकों ने एक एक दिन में कई लोगों को बच्ची के साथ दरिंदगी करने की छूट दी थी. इस पूरी कहानी ने प्रदेश को ही नहीं देश को झकझोर दिया है.वहशीपन की ये कहानी यहीं खत्म नहीं हो जाती. इस मामले में एक और सनसनीखेज आरोप तब सामने आया, जब जांच एजेंसियों को पता चला कि एक होटल मैनेजर ने उस बच्ची की तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर भेजी थीं. इसी के बाद दरिंदगी का वो शर्मनाक खेल शुरू हुआ, जिसके चलते कई लोगों ने उस बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया. इसी तरह से कई अन्य लोग भी इस गुनाह की कड़ी से जुड़ते चले गए. ये वही लोग थे, जो बच्ची की आबरू का सौदा करने के लिए बारी-बारी से होटल पहुंचे थे.
पुलिस का शिकंजा - पुलिस के अनुसार, बच्ची की उन्हीं तस्वीरों के जरिए कई अहम सुराग जांच करने वाली टीम के हाथ लगे.उधर, बच्ची के लापता होने के बाद परिवार ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. पुलिस ने जांच शुरू की और 22 जून को 'होटल जॉय इन' से बच्ची को बरामद कर लिया गया. इसके बाद मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं. जांच आगे बढ़ी तो यह मामला कथित तौर पर संगठित अपराध और मानव तस्करी के एंगल तक पहुंच गया.पुलिस ने इस मामले में अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए लोगों में ई-रिक्शा चालक रामबाबू, होटल मालिक मयंक सैन, होटल मैनेजर हरदीप नाथ और सचिन सहित कई अन्य आरोपी शामिल हैं. इसके अलावा दीपक और तरुण नामक दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है. पुलिस का कहना है कि कुछ आरोपियों ने सीधे अपराध किया, जबकि कुछ ने इस गुनाह में सहयोग किया है।
बुलडोजर एक्शन - होटलों पर चला बुलडोजर जिला प्रशासन ने उन होटलों को चिन्हित किया जहां इस वारदात को अंजाम दिया गया था और जो अवैध रूप से निर्मित थे। इनमें होटल जॉय इन , होटल सफायर और होटल ड्रीम लैंड शामिल हैं, जिन्हें पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया।
सवाल सिर्फ एक नाबालिग बालिका के साथ दरिंदगी का नहीं है सवाल उस घिनौनी मानसिकता का है जो तेरह साल की एक मासूम बच्ची के अपरिपक्व और अविकसित शरीर को भूखे गिद्धों के झुंड की तरह नौंचने में पुलिस कानून सजा अदालत अथवा समाज और ईश्वर किसी का भी भय नहीं मानती है। क्या ईरिकशा वाले की करतूत से यह जाहिर नहीं होता है कि वह पहले भी इसी तरह मासूम लड़कियों को फंसा कर बहला फुसला कर इन होटल वालों के हाथों बेचता रहा होगा? एक शहर में होटल से होटल मासूम नाबालिग लड़की के जिस्म को दरिंदे नोचते रहे और पुलिस को भनक तक नहीं लगी? दरअसल पुलिस ऐसे धंधेबाजो से बंधी रकम माहवार वसूल कर इनके कारनामों से आंखें बंद कर लेती है इसी का नतीजा है कि इस तरह होटल वाले एक मासूम लडकी के जिस्म को भेड़ियों को परोसते रहे। ऐसे घृणित और समाज विरोधी अपराध के लिए सख्त से सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 39 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं)
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