'चाइल्ड केयर होम सिर्फ आश्रय नहीं, नई उम्मीद दें': छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

दो भाई-बहनों को सौतेली बहन की कस्टडी देने से किया इनकार

Published By Gargi Vishwakarma
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नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि चाइल्ड केयर होम (बाल देखभाल गृह) केवल बच्चों को रहने की जगह देने के लिए नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य उन्हें सुरक्षित माहौल, सम्मानजनक जीवन और नई उम्मीद देना भी है। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न झेल चुके दो भाई-बहनों को उनकी सौतेली बहन की कस्टडी में भेजने से इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ सौतेली बहन द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने बच्चों की काउंसलिंग रिपोर्ट और उनकी इच्छा जानने के बाद यह फैसला सुनाया।

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बच्चों ने लगाए गंभीर आरोप

गोपनीय काउंसलिंग के दौरान दोनों बच्चों ने अलग-अलग बातचीत में एक जैसे आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि सौतेली बहन और उसके पति के साथ रहने के दौरान उनसे घर का काम कराया जाता था और छोटे भाई के साथ मारपीट की जाती थी।

लड़की ने यह भी आरोप लगाया कि उसके जीजा ने उसके साथ यौन शोषण की कोशिश की थी। इस मामले में पहले से आपराधिक कार्रवाई चल रही है। अदालत ने कहा कि दोनों बच्चों के बयान स्वतंत्र रूप से दर्ज किए गए और उनमें किसी तरह के दबाव या सिखाए जाने के संकेत नहीं मिले।

बच्चे वापस नहीं जाना चाहते

काउंसलिंग रिपोर्ट के अनुसार दोनों भाई-बहनों ने साफ कहा कि वे डर और पुराने मानसिक आघात की वजह से सौतेली बहन के घर वापस नहीं जाना चाहते। अदालत ने इसे बच्चों के सर्वोत्तम हित में माना और उनकी कस्टडी लौटाने से इनकार कर दिया।

गोद लेने की संभावना तलाशने के निर्देश

हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए फोस्टर केयर (पालक देखभाल) या कानूनी गोद लेने (Adoption) की संभावनाओं पर विचार किया जाए। साथ ही उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास के लिए विस्तृत देखभाल योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए।

भाई-बहन को साथ रखने पर जोर

अदालत ने पाया कि दोनों भाई-बहनों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। इसलिए निर्देश दिया गया कि उन्हें संभव हो तो एक ही शहर के अलग-अलग चाइल्ड केयर होम में रखा जाए और सप्ताह में कम से कम एक बार मिलने की व्यवस्था की जाए।

चाइल्ड केयर होम की व्यवस्था पर भी जताई चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक चाइल्ड केयर होम में भीड़भाड़ पर चिंता जताई। काउंसलिंग के दौरान बच्ची ने बताया कि एक बंक बेड पर तीन बच्चों को सोना पड़ता है। अदालत ने कहा कि यह बच्चों के सम्मानजनक जीवन के अधिकार के अनुरूप नहीं है।

हाईकोर्ट ने सुरगुजा के जिला मजिस्ट्रेट को संस्थान का निरीक्षण कर आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने और हर बच्चे के लिए पर्याप्त जगह, बिस्तर और बेहतर रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

15 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में दोनों बच्चों की कस्टडी सौतेली बहन या उसके पति को नहीं सौंपी जाएगी। साथ ही बाल कल्याण समितियों को बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, काउंसलिंग और पुनर्वास की प्रगति रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।

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गर्गी विश्वकर्मा वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़ी हैं और डिजिटल डिप्टी चीफ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। वह डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्पष्ट, तथ्यपरक और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करती हैं।

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