बंगाल में 280 करोड़ के बैंक घोटाले पर ED का शिकंजा
कोहिनूर पावर से जुड़े 12 ठिकानों पर छापेमारी, PMLA के तहत हुई कार्रवाई
कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता जोनल कार्यालय ने 280 करोड़ रुपए से अधिक के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में पश्चिम बंगाल के विभिन्न इलाकों में 12 स्थानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई।
ईडी ने सोमवार को जारी बयान में बताया कि यह जांच सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) द्वारा कोलकाता की दूसरी विशेष अदालत में दायर शिकायत के आधार पर शुरू की गई थी। मामला कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े व्यक्तियों की वित्तीय गतिविधियों से संबंधित है।
जानकारी के अनुसार, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) ने कंपनी के मामलों की जांच के आदेश दिए थे। यह कदम तब उठाया गया जब भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने उन कंपनियों की सूची मंत्रालय को भेजी थी, जिनके खिलाफ रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में संदिग्ध लेनदेन को लेकर आवेदन दायर किए थे।
ईडी की जांच में सामने आया है कि कंपनी और उसके निदेशकों ने कथित तौर पर गलत जानकारी देने, महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने, खातों में हेरफेर करने और ऋण की राशि को दूसरी जगह स्थानांतरित करने जैसी गतिविधियां कीं। आरोप है कि इन तरीकों से बैंकों के समूह को गुमराह कर वित्तीय सुविधाएं हासिल की गईं।
जांच एजेंसी के अनुसार, बाद में कंपनी दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत परिसमापन प्रक्रिया में चली गई। इस दौरान बैंकों को केवल करीब 7 करोड़ रुपए की ही वसूली हो सकी, जिससे उन्हें लगभग 97.5 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ा।
ईडी ने बताया कि जांच में कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में कई अचल संपत्तियों का पता चला है, जिन्हें कथित अपराध से अर्जित धन से खरीदा गया था। इन संपत्तियों से कंपनी के प्रमोटरों को हर महीने लगभग 26 लाख रुपए किराये की आय होने का भी आरोप है।
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के प्रमोटर विजय बोथरा और प्रशांत बोथरा कथित तौर पर 100 से अधिक शेल कंपनियों को नियंत्रित कर रहे थे। आरोप है कि इन कंपनियों का उपयोग बैंक धोखाधड़ी से प्राप्त धन को इधर-उधर करने और उसे वैध दिखाने के लिए किया जाता था।
ईडी के मुताबिक, बड़ी मात्रा में धनराशि रिश्तेदारों और कथित डमी निदेशकों के नाम पर विदेशों में भी निवेश की गई थी।छापेमारी के दौरान 150 से अधिक शेल कंपनियों और व्यक्तियों के बैंक खातों को फ्रीज किया गया है। साथ ही शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय निवेशों पर भी रोक लगाई गई है।
एजेंसी ने बताया कि फ्रीज की गई बैंक जमा राशि और वित्तीय परिसंपत्तियों का कुल मूल्य करीब 64 करोड़ रुपए है।तलाशी अभियान के दौरान डिजिटल साक्ष्य, कंपनी रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े कागजात भी बरामद किए गए हैं। ईडी इन दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है, ताकि कथित अपराध से अर्जित धन और उससे खरीदी गई अन्य संपत्तियों का पता लगाया जा सके।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
