बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद एबीआरएसएम का विस्तार, सदस्य संख्या 40 हजार के पार
कोलकाता । पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध शिक्षक संगठन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) ने अपने संगठनात्मक विस्तार पर विशेष जोर दिया है। संगठन का दावा है कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद उसके सदस्य संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और अब वर्ष 2026-27 के लिए लगभग डेढ़ लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
संगठन के अनुसार, स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एबीआरएसएम का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। हालांकि सदस्यता के लिए बढ़ती उत्सुकता के बीच संगठन ने सतर्क रुख अपनाया है। एबीआरएसएम नेतृत्व का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस शासनकाल में सक्रिय नेतृत्वकारी भूमिका निभाने वाले शिक्षकों को संगठन में शामिल नहीं किया जाएगा। वहीं, वे शिक्षक और शिक्षाकर्मी जो पहले वामपंथी या तृणमूल समर्थित संगठनों से जुड़े थे अथवा परिस्थितिवश जुड़े रहने को मजबूर थे, उनका स्वागत किया जाएगा।
एबीआरएसएम विद्यालय शिक्षा प्रकोष्ठ के राज्य महासचिव बापी प्रमाणिक ने कहा कि संगठन भारत का सबसे बड़ा गैर-राजनीतिक राष्ट्रवादी शिक्षक संगठन है। पश्चिम बंगाल में वर्ष 1992 से यह संगठन योग्य नागरिक निर्माण, भारतीय संस्कृति आधारित शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने तथा शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की विभिन्न मांगों को लेकर कार्य कर रहा है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष संगठन के सदस्यों की संख्या लगभग 10 हजार थी। लेकिन इस वर्ष ग्रीष्मावकाश के बाद विद्यालय खुलने के मात्र तीन दिनों के भीतर ही सदस्य संख्या बढ़कर 40 हजार तक पहुंच गई है। संगठन को उम्मीद है कि चालू वर्ष में यह संख्या डेढ़ लाख के लक्ष्य तक पहुंच जाएगी।
बापी प्रमाणिक ने गुरुवार को कहा कि एबीआरएसएम का उद्देश्य केवल शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों के अधिकारों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाना भी है। इसके साथ ही शिक्षा व्यवस्था को राजनीति, भ्रष्टाचार, तुष्टीकरण और वंचना से मुक्त करना संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
संगठन का दावा है कि वर्तमान में एबीआरएसएम देश के 28 राज्यों और 100 से अधिक विश्वविद्यालयों में सक्रिय है। पूरे देश में इसके सदस्यों की संख्या लगभग 15 लाख बताई जा रही है। संगठन का मानना है कि पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच शिक्षा जगत में उसकी स्वीकार्यता और प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है।
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लेखक के बारे में
सुधा जायसवाल ने मास कम्युनिकेशन एवं पत्रकारिता (MJMC) में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है और पत्रकारिता क्षेत्र में 12 वर्षों से सक्रिय हैं। वह अमर उजाला, स्वतंत्र भारत, जनसंदेश टाइम्स और तरुण मित्र जैसे संस्थानों में कार्य कर चुकी हैं। राजनीतिक, शिक्षा और नगर निगम सहित विभिन्न बीट्स पर रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाली सुधा वर्तमान में तरुण मित्र के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई हैं।
