उत्तराखंड में जंगली जानवरों का बढ़ा आतंक, फसलें बर्बाद होने से किसान बेहाल
वन विभाग ने कसी कमर
रुद्रप्रयाग समेत कई जिलों में जंगली सूअर, बंदर और भालुओं से परेशानी, रोकथाम के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर जोर
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग में जानवरों ने किसानों का जीना बेहाल कर दिया है। इसके पीछे की मुख्य वजह है जंगली जानवरों का विचरण। लेकिन, अब वन विभाग की टीम ने इसे लेकर मोर्चा संभाल लिया है। विभाग की ओर से जंगली जानवरों पर लगाम लगाने की तैयारी की जा रही है, ताकि स्थिति को चुनौतीपूर्ण होने से रोका जा सके। वन विभाग के प्रभागीय वनाधिकारी विनीत कुमार मिश्रा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में अपने अगले कदम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनका विभाग इन जंगली जानवरों के कहर पर अंकुश लगाने की दिशा में सख्त कदम उठाने जा रहा है।
वनाधिकारी विनीत कुमार ने कहा कि उत्तराखंड के कई जिलों में जंगली जानवरों के कहर की वजह से खेती करना मुश्किल हो चुका है। किसानों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह जंगली जानवर अपने आतंक से पूरी फसल खराब कर दे रहे हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। इन्हीं सब स्थिति को ध्यान में रखते हुए अब हमने मोर्चा संभाल लिया है। हम इस पर पूरी तरह से रोकथाम लगा रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं कि जंगल जानवरों के कहर पर अंकुश लग सके। इसके लिए हम लोग दीर्घकालीक उपायों के साथ-साथ अल्पकालिक कामों को भी जमीन पर उतारने की दिशा में काम कर रहे हैं। यहां पर मुख्यत: जंगली सूअर, बंदर और भालुओं की बड़ी समस्या है। हम अलग-अलग जानवरों के लिए अलग-अलग तरकीब अपनानी होगी। एक ही जैसे नियम सभी जानवरों पर लागू नहीं होते हैं। हमें अलग-अलग तरकीब अपनाने होंगे, तभी जाकर स्थिति सामान्य हो पाएगी।
उन्होंने कहा कि खासकर जंगलों में सूअर से हमारे खेतों को बहुत नुकसान हो रहा है। हम इस पर अंकुश लगाने की दिशा में पूरी तरह से तैयार हैं। जैसे ही हमें शीर्ष नेतृत्व से कोई पर्याप्त फंड मिलता है, हम उसे जमीन पर उतारने की दिशा में काम करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जंगली जानवरों से किसानों की फसलों को बचाया जा सके। इसके अलावा, हम जानवरों के कहर पर अंकुश लगाने के लिए अल्पकालिक परियोजना पर भी काम कर रहे हैं। अब जैसे अगर भालुओं की बात करें, तो पहाड़ों में रहते हैं। इसके बाद रात के समय खाने के लिए किसानों की फसलों पर अटैक करते हैं। ऐसी स्थिति में अब इस पर अंकुश लगाने की दिशा में पूरी योजना को तैयार कर रहे हैं। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इस योजना को धरातल पर सफलतापूर्वक जमीन पर उतारा जा सके, ताकि हमारे किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हो।
वनाधिकारी के मुताबिक, हम अपने विभाग के अधिकारियों को फील्ड में भेजकर उस पूरी स्थिति और जगह को चिह्नित करने का प्रयास कर रहे हैं, जहां पर जंगली जानवर दाखिल होकर किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हम यहां पता लगा रहे हैं कि आखिर ये जंगली जानवर कहां से आ रहे हैं। हालांकि, हमारे लिए जानवरों के व्यवहार के बारे में पता लगा पाना मुश्किल हो पाता है। लेकिन, हमारे लिए इस संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी जुटा पाना मुश्किल है कि आखिर यह कहां से आ रहे हैं। लेकिन, हम इस दिशा में पूरी जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं। हमें पूरा विश्वास है कि हमें इस दिशा में सफलता प्राप्त होगी।
उन्होंने कहा कि हमने किसानों को सुझाव दिया है कि अगर उन्हें कहीं पर भी भालु आते-जाते दिखे, तो वो मिर्ची का धुआं करें। इससे वो यहां से भाग जाएंगे। इसके बाद कुछ जगहों पर सूअर और बंदरों के लिए पटाखा फोड़ने का सुझाव दिया है। हमने यह सब उन्हें दिया भी है। वहीं, बंदरों का आवागमन भी तेजी से बढ़ रहा है। खासकर, मंदिर और पर्यटक स्थल पर बड़ी संख्या में बंदर आते-जाते हैं। इन्हीं सब स्थिति को देखते हुए हमने 1300 बंदरों को पकड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हमने काफी हद तक अपना लक्ष्य पूरा किया है। हम अपने इस लक्ष्य को इस साल हर हाल में पूरा कर लेंगे। गुलदारो के लिए हमने सभी संवेदनशील स्थानों पर कैज लगा रहे हैं, ताकि उन्हें पकड़ा जा सके।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
