बुढ़ापे के रोग जन्म लेने लगते,तब शरीर को योग की जरूरत पड़ती:डॉ दयाशंकर
लखनऊ। बुढ़ापे के रोग जब जन्म लेने लगते हैं,तब शरीर को योग की जरूरत पड़ती है। मन और आत्मा को योग ही प्रसन्न रख सकता है। व्यायाम से केवल शरीर स्वस्थ रहता है मन नहीं। आज की व्यस्ततम जीवन शैली में योग प्राणायाम के माध्यम से शारीरिक मानसिक रूप से स्वस्थ रहा जा सकता है। योग ही व विद्या है जिसको पूरे संसार ने माना है। योग से आज मुस्लिम देश भी जुड़े हैं यह कोई पूजा पद्धति नहीं है। योग के माध्यम से ही सर्वांगीण स्वास्थ्य की कल्पना की जा सकती है। ये बातें मंत्री डॉ दयाशंकर मिश्र "दयालु" ने कही।
सोमवार को राजकीय आयुर्वेद कॉलेज टूडियागंज में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश व्यापी राज्य स्तरीय योग सप्ताह कार्यक्रम का उद्घाटन आयुष राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार डा दयाशंकर मिश्र दयालु के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मंत्री एवं प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार,आयुष महानिदेशक चैत्रा वी.विशेष सचिव मदन सिंह गबरियाल,निदेशक आयुर्वेद डॉ नारायण दास,निदेशक यूनानी प्रो जमाल अख्तर,निदेशक होम्योपैथिक डॉ प्रमोद कुमार द्वारा महाविद्यालय परिसर में औषधीय पौधों का रोपण किया गया। प्रमुख सचिव रंजन कुमार ने पूरे सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रदेश के 75 जिलों में,सभी ग्राम पंचायत में योग दिवस मनाया जाएगा। इस बार की योग दिवस की थीम है योगा फॉर हेल्थी एजिंग। योग सप्ताह की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए मंत्री ने कहा कि योग को जन-जन तक पहुंचाना है और इसके लिए प्रदेश सरकार और भारत सरकार युद्ध स्तर पर प्रयास कर रही है। प्रत्येक मनुष्य को प्रतिदिन तीस मिनट का योग अभ्यास को अपनी दिनचर्या में अवश्य शामिल करना चाहिए। इस कार्यक्रम में दयानंद बाल विद्यालय के बच्चों द्वारा योगासन का अद्भुत प्रदर्शन किया गया। मंत्री ने इस अवसर पर बच्चों को पुरस्कार देकर उत्साहवर्धन किया।
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शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
