रूप नहीं, स्वरूप को सुंदर बनाएं: आचार्य निर्भय सागर
फिरोजाबाद। छदामी लाल जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने बाहरी रूप से अधिक आंतरिक स्वरूप को निखारने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रूप इंसान को बाहरी दुनिया की ओर ले जाता है, जबकि स्वरूप उसे अंतरात्मा की यात्रा कराता है।
आचार्य श्री ने कहा कि आज सुंदर दिखने की चाह में लोग तरह-तरह के सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा कॉस्मेटिक उत्पादों का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने विशेष रूप से लिपिस्टिक, नेल पॉलिश और अन्य सौंदर्य प्रसाधनों में मौजूद रासायनिक एवं कृत्रिम पदार्थों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि संवेदनशील लोगों में ऐसे उत्पादों के कारण एलर्जी, खुजली, जलन और त्वचा संबंधी अन्य परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए महिलाओं को सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करते समय उनकी गुणवत्ता और सामग्री पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
बाहरी सुंदरता क्षणिक, आत्मिक सौंदर्य शाश्वत
आचार्य निर्भय सागर महाराज ने कहा कि बाहरी सुंदरता समय के साथ बदल जाती है, जबकि आत्मा का स्वरूप शाश्वत है। मनुष्य को शरीर की सजावट से ज्यादा अपने विचार, व्यवहार, संस्कार और आत्मिक गुणों को सुंदर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
प्रवचन से पहले सुहाग नगर जैन समाज और अपराजिता महिला मंडल की ओर से भक्तिमय संगीत के बीच आचार्य श्री का पूजन किया गया।
इस अवसर पर फिरोजाबाद परिषद के अध्यक्ष विनोद कुमार मिलानी, एडवोकेट अजय जैन, संभव जैन, सुशील जैन, निमेश जैन, शैलेंद्र जैन, मीडिया प्रभारी अजय जैन बजाज सहित बड़ी संख्या में श्रावक मौजूद रहे।
मंदिरों में चल रहा जन-जागरण अभियान
पर्यूषण पर्व के अवसर पर नगर के विभिन्न जैन मंदिरों में जन-जागरण अभियान भी चलाया जा रहा है। आचार्य श्री के संघस्थ मुनिराज अलग-अलग मंदिरों में शांतिधारा और धर्मोपदेश के माध्यम से श्रावकों को धर्म, संयम और आत्मचिंतन का संदेश दे रहे हैं।
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लेखक के बारे में
रविंद्र वर्मा वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के फिरोज़ाबाद ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ के साथ वह समाचार कवरेज और रिपोर्टिंग का कार्य कर रहे हैं।
