लखनऊ पुलिस के 68 रिक्रूट आरक्षियों को संवेदनशील संवाद का प्रशिक्षण
UNICEF की विशेषज्ञ ने महिलाओं और बच्चों से बातचीत, कानूनों और फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका पर दी जानकारी
लखनऊ। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की Specialized Training शाखा की ओर से वर्ष 2025 बैच के रिक्रूट आरक्षियों के लिए पीड़ितों और बच्चों के साथ सहानुभूतिपूर्ण एवं संवेदनशील संवाद स्थापित करने के विषय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम 20 अगस्त 2026 को रिजर्व पुलिस लाइन्स, कमिश्नरेट लखनऊ स्थित संगोष्ठी सदन में हुआ।
यह प्रशिक्षण उत्तर प्रदेश शासन और पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के क्रम में पुलिस आयुक्त लखनऊ तरूण गाबा के निर्देशन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था बबलू कुमार तथा पुलिस उपायुक्त मुख्यालय अमित कुमावत के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यशाला का संचालन पुलिस उपायुक्त महिला अपराध एवं सुरक्षा ममता रानी चौधरी के निर्देशन और सहायक पुलिस आयुक्त महिला अपराध शाहिदा नसरीन के पर्यवेक्षण में किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य नवआरक्षियों को संवेदनशील, सजग और प्रभावी फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में तैयार करना रहा।
68 रिक्रूट आरक्षियों ने लिया प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यशाला में कमिश्नरेट लखनऊ के सभी थानों से वर्ष 2025 बैच के कुल 68 रिक्रूट आरक्षियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण सत्र में UNICEF की डिविजनल कंसल्टेंट रिजवाना परवीन ने प्रतिभागियों को विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया।
पीड़ितों से संवाद के तरीके बताए
प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को बताया गया कि घटनास्थल या थाने पर पहुंचने के बाद फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। पीड़ित की बात धैर्यपूर्वक सुनना, उसकी भावनात्मक स्थिति को समझना और उसे आवश्यक सहयोग व सुरक्षा का भरोसा देना पुलिसिंग का अहम हिस्सा है।
प्रतिभागियों को विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के साथ बातचीत करते समय संवेदनशील, सहानुभूतिपूर्ण और व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने के बारे में जानकारी दी गई। संवाद कौशल और व्यवहारिक विकास पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
महिलाओं और बच्चों से जुड़े कानूनों की जानकारी
कार्यशाला में महिलाओं और बच्चों से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों के बारे में भी जानकारी दी गई। इसमें घरेलू हिंसा से संबंधित कानून, किशोर न्याय अधिनियम और पॉक्सो एक्ट समेत अन्य प्रासंगिक प्रावधान शामिल रहे।
इसके अलावा प्रशिक्षणार्थियों को वन स्टॉप सेंटर, बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड की भूमिका और कार्यप्रणाली के बारे में बताया गया। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में पीड़ितों को आवश्यक सहयोग, संरक्षण उपलब्ध कराने और विधिक प्रक्रिया का पालन करने के संबंध में भी प्रशिक्षण दिया गया।
संवेदनशील पुलिसिंग पर जोर
कमिश्नरेट लखनऊ की ओर से कहा गया कि आमजन, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित, संवेदनशील और सहयोगपूर्ण पुलिसिंग उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिसकर्मियों के संवाद कौशल, व्यवहारिक दक्षता और विधिक ज्ञान को मजबूत किया जा रहा है।
पुलिस का उद्देश्य है कि किसी भी घटना के बाद पीड़ित को समयबद्ध, मानवीय और प्रभावी सहायता मिल सके। प्रशिक्षण के जरिए रिक्रूट आरक्षियों को ऐसी परिस्थितियों में बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया देने और पीड़ितों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया जा रहा है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
