लखनऊ में दरोगा के पैरों पर गिरकर न्याय की भीख मांगता रहा बेबस पिता
इकलौते बेटे की प्राइवेट अस्पताल में मौत
मड़ियांव थाना इलाके के जानकीपुरम में स्थित अस्पताल का मामला -बीते 27 जुलाई को सीतापुर के बिसवां में हुआ था सड़क हादसा
लखनऊ। गुरुवार मड़ियांव इलाके के जानकीपुरम स्थित एक अस्पताल में युवक की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा काटा। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने ईलाज के नाम पर ठगी की। लाखों रुपया जमा कराने के बाद युवक को मृत घोषित कर दिया। जिसके बाद नाराज परिजनों ने सड़क जाम कर दी। घटना की सूचना मिलते ही पहुंची पुलिस ने हालात काबू करने की कोशिश की। इस दौरान मृतक के पिता एक दरोगा के पैरों पर पड़कर न्याय की भीख मांगते नजर आया। हलांकि देर शाम पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिजनों से प्राप्त तहरीर के आधार पर पुलिस जांच में जुटी है।
जानकारी के मुताबिक़ सीतापुर के सिधौली तहसील के बिसवां रोड स्थित गरौली गांव के रहने वाले मनोज मानदेय के पुत्र शिवा पांडेय का बीते 27 जुलाई की रत 11 बजे एक्सीडेंट हो गया था। वह देर रात बिसवां रोड के हसनापुर में रहने वाली बहन के घर से लौट रहे थे। इस दौरान उनकी स्कूटी में तेज रफ्तार अज्ञात पिकप ने टक्कर मार दी थी। इस घटना में उनका दायां हाथ बुरी तरह क्षतिग्रत हो गया था। हाथ की सभी पसलियां और हड्डियां टूट गई थी। उन्हें गंभीर रूप में केजीएमसी के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था।
परिजनों का कहना है की केजीएमसी में समय से इलाज न होने के कारण वह उसे वहां से इंदिरा नगर स्थित एक निजी अस्पताल लेकर गए। जिसके बाद बीते रात उसे जानकीपुरम के सेक्टर बी स्थित सेन्योर अस्पताल में भर्ती कार्य गया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में मरीज के भर्ती होते ही ईलाज के नाम पर पचास हजार जमा करा लिए। वहीं ऑपरेशन करने के लिए तीन यूनिट खून की व्यवस्था करने को कहा।
आरोप है कि गुरूवार सुबह अस्पताल प्रशासन ने ऑपरेशन का लम्बा खर्चा बताकर एक लाख जमा करने को कहा। आरोप है कि पैसा जमा करने के बाद अस्पताल प्रशासन ने बताया कि मरीज की मौत हो गई है। जिसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा काटा। इसके बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया और सड़क जाम करने का प्रयास किया। मौके पर स्थिति को संभालने के लिए मड़ियांव और जानकीपुरम दोनों थानों की पुलिस बुलाई गई। इस मामले में पुलिस और आपसी सहमति के बाद परिजन शव के पोस्टमार्टम के लिए माने हैं। पुलिस ने पीड़ित परिवार से तहरीर लेकर जांच शुरू कर दी है।
सड़ चुका था हाथ आ रही थी बदबू
अस्पताल में तैनात सुरक्षा कर्मियों ने बताया बुधवार रात मरीज को अस्पताल में लाया गया था। एम्बुलेंस से जब उसे उतारा गया तो उससे बहुत तेज बदबू आ रही थी। वहीं अस्पताल के सीनियर डॉक्टर अमित स्वास्तु ने बताया कि मरीज को रात करीब 3:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उसका एक हाथ में पूरी तरह गैंग्रीन था और सड़ चुका था। अस्पताल ने शुरुआती इलाज किया और सर्जरी की सलाह दी थी। इलाज के दौरान जब इन्फेक्शन शरीर में चला गया, जिससे हार्ट ब्लॉक हो गया। हमने बचाने के लिए सीपीआर भी दिया, लेकिन मरीज को बचाया नहीं जा सका। प्रबंधक का कहना है कि मरीज की मौत के बाद परिजनों ने झूठा आरोप लगाया कि मरीज को मार दिया गया है। इसके बाद उन्होंने अस्पताल में हंगामा किया और अस्पताल के स्टाफ व गार्ड्स के साथ मारपीट की।
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लेखक के बारे में
पिछले छह वर्षों से क्राइम रिपोर्टिंग में सक्रिय सत्य प्रकाश भारती अपराध से जुड़े मामलों पर गहरी पकड़ रखते हैं। तथ्यपरक रिपोर्टिंग और संतुलित प्रस्तुति उनकी कार्यशैली की पहचान है। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ में कार्यरत हैं।
