दुःखहरण नाथ मंदिर में शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन गूंजी शिव महिमा

चंचुला-बिन्दुग प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर

Published By Harshit
On
Harshit Picture
By Harshit

मोहम्मद अय्यूब, उतरौला संवाददाता

उतरौला(बलरामपुर)। बाबा श्री दुःखहरण नाथ मंदिर परिसर में चल रहे दस दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान महायज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास श्री जगदम्बा प्रसाद मिश्र जी महाराज (अवध धाम) ने अपनी मधुर, ओजपूर्ण एवं भावपूर्ण वाणी से भगवान शिव की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान पौराणिक प्रसंगों का ऐसा भावपूर्ण चित्रण हुआ कि श्रद्धालु देर तक मंत्रमुग्ध होकर कथा श्रवण करते रहे।

कथा व्यास ने शिव महापुराण के माहात्म्य, भगवान शिव की भक्ति की महत्ता, चंचुला-बिन्दुग प्रसंग, आनंद की अनुभूति तथा मनुष्य के माया-मोह के बंधन जैसे आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य सांसारिक सुख-सुविधाओं और मोह-माया में उलझकर अपने वास्तविक आध्यात्मिक लक्ष्य को भूल जाता है। शिव भक्ति, सत्संग, कथा श्रवण और सदाचार ही मनुष्य को भीतर से शुद्ध करने का मार्ग दिखाते हैं।

सावन का आज तीसरा सोमवार : वाराणसी में  कांवड़ियों की उमड़ी भारी भीड़ ये खबर भी पढ़े : सावन का आज तीसरा सोमवार : वाराणसी में कांवड़ियों की उमड़ी भारी भीड़

कथा व्यास ने शिव महापुराण के माहात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि शिव महापुराण केवल भगवान शिव की महिमा का ग्रंथ नहीं, बल्कि भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और आत्मचिंतन का मार्गदर्शन करने वाला पवित्र ग्रंथ है। पौराणिक परंपरा में शिवकथा के श्रवण को ऐसा साधन बताया गया है, जो मनुष्य के भीतर वैराग्य और ईश्वर के प्रति श्रद्धा उत्पन्न करता है। शिवपुराण की कथाओं में भगवान शिव को कल्याणकारी, करुणामय और भक्तवत्सल स्वरूप में वर्णित किया गया है।

शिवपुराण की एक प्रमुख शिक्षा यह है कि मनुष्य को केवल बाहरी सुखों की प्राप्ति के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझना चाहिए। भगवान शिव की उपासना में श्रवण, कीर्तन और मनन को महत्वपूर्ण साधन माना गया है।

कथा के दौरान चंचुला और बिन्दुग का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया। पौराणिक कथा के अनुसार बिन्दुग नामक ब्राह्मण अपनी पत्नी चंचुला से विमुख होकर दुराचार के मार्ग पर चला गया था। उसके जीवन में सांसारिक मोह और विषय-वासनाएं इतनी प्रबल हो गईं कि वह धर्म और सदाचार से दूर होता चला गया। उसके दुष्कर्मों का परिणाम उसे मृत्यु के बाद अत्यंत कष्टदायक योनि में भुगतना पड़ा। शिवपुराण माहात्म्य के वर्णन में बिन्दुग के पिशाच योनि में जाने का प्रसंग आता है।

दूसरी ओर चंचुला भी पति के दुराचरण और सांसारिक वातावरण से प्रभावित होकर जीवन के वास्तविक उद्देश्य से दूर हो गई थी। समय बीतने के बाद जब उसे गोकर्ण क्षेत्र में शिवकथा श्रवण का अवसर मिला तो उसके जीवन की दिशा बदल गई। शिवकथा के प्रभाव से उसके भीतर वैराग्य जागा और उसे अपने जीवन की भूलों का बोध हुआ। उसने भगवान शिव की शरण ग्रहण कर भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का मार्ग अपनाया। शिवपुराण माहात्म्य में बताया गया है कि कथा श्रवण के बाद चंचुला का चित्त शुद्ध हुआ और वह शिवभक्ति में लीन हो गई।

कथा के अगले प्रसंग में बताया गया कि शिवभक्ति में लीन होने के बाद चंचुला को अपने पति बिन्दुग की चिंता सताने लगी। उसने भगवती पार्वती से अपने पति की गति के विषय में पूछा और उसके उद्धार की प्रार्थना की।

पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने चंचुला को बताया कि बिन्दुग को उसके कर्मों के कारण पिशाच योनि प्राप्त हुई है, लेकिन शिव महापुराण की कथा के श्रवण से उसका उद्धार संभव है। चंचुला ने पति के कल्याण के लिए प्रार्थना की। इसके बाद माता पार्वती ने भगवान शिव के परम भक्त एवं गन्धर्वराज तुम्बुरु को बिन्दुग को शिवपुराण सुनाने का आदेश दिया।

कथाव्यास ने बताया कि माता पार्वती की आज्ञा पाकर तुम्बुरु विंध्य पर्वत पहुंचे, जहां बिन्दुग पिशाच योनि में था। वहां उन्होंने शिव महापुराण की कथा का आयोजन किया। पौराणिक आख्यान के अनुसार देवर्षियों और अन्य श्रोताओं की उपस्थिति में शिवपुराण का श्रवण हुआ।

कथा श्रवण के प्रभाव से बिन्दुग के पापों का क्षय हुआ और उसे पिशाच योनि से मुक्ति प्राप्त हुई। इसके बाद उसका दिव्य स्वरूप प्रकट हुआ और वह भगवान शिव की भक्ति में लीन हो गया। कथा के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती ने प्रसन्न होकर उसे अपना पार्षद स्वीकार किया, जबकि चंचुला को माता पार्वती की सखी का स्थान प्राप्त हुआ। इस प्रसंग के माध्यम से कथा व्यास ने समझाया कि सच्चे मन से भगवान की शरण ग्रहण करने और शिवकथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण करने से मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन संभव है।

कथा के दौरान आनंद की अनुभूति को भी आध्यात्मिक दृष्टि से समझाया गया। वेदांत परंपरा में प्रिय, मोद और प्रमोद को आनंदमय कोश से जुड़ी मानसिक वृत्तियों के रूप में समझाया जाता है। किसी प्रिय वस्तु की चाह या उसका प्रिय लगना ‘प्रिय’, उसकी प्राप्ति से उत्पन्न प्रसन्नता ‘मोद’ तथा उसके वास्तविक उपभोग से उत्पन्न अधिक आनंद ‘प्रमोद’ कहा गया है।

कथाव्यास ने इसी संदर्भ में श्रद्धालुओं को समझाया कि सांसारिक आनंद क्षणिक होता है, जबकि ईश्वर की भक्ति से मिलने वाला आध्यात्मिक आनंद मनुष्य को भीतर से स्थिर और संतुष्ट करता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि अपने सुख का आधार केवल संसार को बनाएगा तो मोह और असंतोष से मुक्त नहीं हो पाएगा। वास्तविक शांति ईश्वर की शरण में ही प्राप्त होती है।

कथा व्यास श्री जगदम्बा प्रसाद मिश्र महाराज ने कहा कि मनुष्य जन्म से ही अनेक प्रकार के संबंधों, इच्छाओं, वासनाओं और भौतिक आवश्यकताओं से घिरा रहता है। यही माया का बंधन है। धन, पद, प्रतिष्ठा, परिवार और भौतिक सुख आवश्यक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें जीवन का अंतिम लक्ष्य मान लेना मनुष्य को आध्यात्मिक सत्य से दूर कर देता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि गृहस्थ जीवन के दायित्वों का निर्वहन करते हुए भी भगवान शिव का स्मरण, शिवनाम का जप, सत्संग और धार्मिक कथाओं का श्रवण करते रहना चाहिए। सदाचार, संयम, करुणा और परोपकार को जीवन में उतारना ही शिवभक्ति का वास्तविक स्वरूप है।

कथा के दौरान भक्ति संगीत की भी मनमोहक प्रस्तुति हुई। अखंड म्यूजिकल ग्रुप एवं सुमित संगीत म्यूजिकल परिवार के पुष्पेंद्र यादव, सुमित गुप्ता एवं धीरेन्द्र कुमार गुप्ता ने मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को शिवमय कर दिया। भजनों के दौरान श्रद्धालु भक्तिभाव में झूमते दिखाई दिए और पूरे कथा पंडाल में ‘हर हर महादेव’ के जयघोष गूंजते रहे।

कथा में यजमान के रूप में मंदिर के महंथ मयंक गिरि महाराज एवं उत्तराधिकारी त्रिपुरारी गिरि  उपस्थित रहे। वहीं यज्ञाचार्य विजय तिवारी एवं अमरेश मिश्रा ने वैदिक विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न कराया। कथा एवं यज्ञ के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। कथा में बाबा श्री दुःखहरण नाथ सेवा समिति, उतरौला के सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक बैठकर कथा का श्रवण किया और भगवान शिव की आराधना की।

आयोजन की व्यवस्थाओं में अरुण गोस्वामी, सुरेश यादव, राहुल गुप्ता, अमित कौशल, संजीव कसौधन, दीपक कौशल, नकुल सोनी, रामजी मोदनवाल, हनुमान गुप्ता, पिन्टू पटवा, निधि गुप्ता, नीलम चौहान एवं प्रिंशु कौशल सहित समिति के सदस्यों का विशेष योगदान रहा।

कथा के समापन तक मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की महिमा और पौराणिक प्रसंगों का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं से आगामी कथा दिवसों में भी अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर शिव महापुराण का श्रवण करने, भगवान शिव का स्मरण करने और कथा में बताए गए सदाचार एवं आध्यात्मिक संदेशों को जीवन में उतारने का आह्वान किया।

लेखक के बारे में

Harshit Picture

हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

नवीनतम

वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के सम्मान से मजबूत होगी संगठन की जड़ें

देवरिया। भाजपा के वरिष्ठ एवं समर्पित कार्यकर्ताओं के सम्मान और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के उद्देश्य से...
उत्तर प्रदेश 
वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के सम्मान से मजबूत होगी संगठन की जड़ें

लखनऊ में छात्र-छात्राओं का प्रदर्शन खत्म, अधिकारियों ने समझाकर विद्यालय लौटाया

स्कूल पहुंचकर अधिकारियों ने शुरू की वार्ता
राज्य  उत्तर प्रदेश 
लखनऊ में छात्र-छात्राओं का प्रदर्शन खत्म, अधिकारियों ने समझाकर विद्यालय लौटाया

औचक निरीक्षण में एसपी ने परखी चरवा थाने की पुलिसिंग, लंबित विवेचनाओं के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश

कौशाम्बी। जिले पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने सोमवार को थाना चरवा का आकस्मिक निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई और पुलिस कार्यप्रणाली...
उत्तर प्रदेश 
औचक निरीक्षण में एसपी ने परखी चरवा थाने की पुलिसिंग, लंबित विवेचनाओं के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश

उत्तर प्रदेश

वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के सम्मान से मजबूत होगी संगठन की जड़ें

देवरिया। भाजपा के वरिष्ठ एवं समर्पित कार्यकर्ताओं के सम्मान और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के उद्देश्य से...
उत्तर प्रदेश 
वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के सम्मान से मजबूत होगी संगठन की जड़ें

लखनऊ में छात्र-छात्राओं का प्रदर्शन खत्म, अधिकारियों ने समझाकर विद्यालय लौटाया

स्कूल पहुंचकर अधिकारियों ने शुरू की वार्ता
राज्य  उत्तर प्रदेश 
लखनऊ में छात्र-छात्राओं का प्रदर्शन खत्म, अधिकारियों ने समझाकर विद्यालय लौटाया

औचक निरीक्षण में एसपी ने परखी चरवा थाने की पुलिसिंग, लंबित विवेचनाओं के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश

कौशाम्बी। जिले पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण ने सोमवार को थाना चरवा का आकस्मिक निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई और पुलिस कार्यप्रणाली...
उत्तर प्रदेश 
औचक निरीक्षण में एसपी ने परखी चरवा थाने की पुलिसिंग, लंबित विवेचनाओं के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश