13 करोड़ की सड़क पहली बरसात में ही हुई जर्जर, चार माह में उखड़ गया देवीगंज बाईपास

3.3 किमी लंबे मार्ग पर जगह-जगह गड्ढे, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल; शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारों ने नहीं की कार्रवाई

Published By Rohit Tiwari
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IMG-20260809-WA0231कौशाम्बी। जिले में करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कराया गया देवीगंज बाईपास पहली ही बरसात में बदहाल हो गया है। निर्माण पूरा होने के महज चार महीने बाद ही सड़क जगह-जगह टूटने लगी है और बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। इससे मार्ग पर आवागमन करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस महत्वपूर्ण मार्ग की दुर्दशा ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सिराथू तहसील क्षेत्र में स्थित यह बाईपास कौशाम्बी-लखनऊ हाईवे को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में बनाया गया है। करीब 3.3 किलोमीटर लंबे देवीगंज बाईपास के निर्माण पर लगभग 13 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए थे और संबंधित अधिकारियों से शिकायत भी की गई थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब पहली बरसात के बाद सड़क की स्थिति सामने आने से शिकायतों की गंभीरता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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चार माह में ही सड़क की हालत खराब

स्थानीय लोगों के मुताबिक निर्माण कार्य पूरा हुए अभी कुछ ही महीने बीते हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। बरसात का पानी गड्ढों में भरने से वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। रात के समय दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण में मानकों का सही ढंग से पालन किया गया होता तो इतनी कम अवधि में सड़क की यह स्थिति नहीं होती।

निर्माण की गुणवत्ता की जांच की उठी मांग

करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क के इतनी जल्दी खराब होने को लेकर क्षेत्र के लोगों में नाराजगी है। लोगों ने सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, निर्धारित मानकों, मोटाई और निर्माण प्रक्रिया की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई और सड़क को मानक के अनुरूप दोबारा दुरुस्त कराने की मांग उठाई गई है।

अधिकारी-ठेकेदार की भूमिका की जांच की मांग

सड़क निर्माण में धांधली के आरोपों के बीच पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य की निगरानी में लापरवाही बरती गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सरकारी धन के उपयोग पर भी उठे सवाल

महज चार महीने में करोड़ों की लागत से बनी सड़क के क्षतिग्रस्त होने से सरकारी धन के उपयोग को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सड़क की गुणवत्ता की नियमित निगरानी और निर्माण के दौरान मानकों की जांच होती तो सरकारी धन की बर्बादी को रोका जा सकता था। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के उच्चाधिकारियों से मौके पर जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।


लेखक के बारे में

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पिछले छह वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय रोहित तिवारी कौशांबी में आधारित हैं और क्षेत्रीय मुद्दों की कवरेज में लगातार कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं।

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