रामायणकालीन विरासत के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, विकसित होगा ऋषि आश्रम रामघाट

क्यूआर कोड स्कैन करते ही जान सकेंगे तीर्थ स्थल का इतिहास, नई पीढ़ी के लिए होगा और आसान

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उमेश श्रीवास्तव

  • मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना के तहत 66.86 लाख रुपए की धनराशि स्वीकृत

गोंडा। रामायण काल से जुड़ी आस्था और विरासत को संवारने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है। रामायण सर्किट अंतर्गत जनपद गोंडा के त्रेतायुगीन दिव्य पौराणिक तीर्थ स्थल अष्टावक्र ऋषि आश्रम रामघाट का पर्यटन विकास कराया जा रहा है। मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान श्रीराम ने बाण का संधान कर उसे दक्षिण दिशा में छोड़ा था। इसके परिणामस्वरूप सरयू नदी से निकली एक जलधारा यहां से होकर पुनः सरयू में जा मिली थी। मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना के तहत इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 66.86 लाख रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई है।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'गोंडा स्थित श्री अष्टावक्र ऋषि आश्रम रामघाट धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। पर्यटन विकास कार्यों से तीर्थ स्थल पर मूलभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और श्रद्धालुओं व पर्यटकों को बेहतर वातावरण मिलेगा। परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इससे गोंडा जिले की पर्यटन पहचान और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 की पहली तिमाही में जनपद में 3.41 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ।'

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"क्या होंगे विकास कार्य?"
त्रेतायुगीन आस्था और इतिहास से जुड़े इस पर्यटन स्थल को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाया जाएगा। आगंतुकों की सुविधा को केंद्र में रखकर यहां मूलभूत पर्यटन सुविधाओं का व्यापक विकास किया जाएगा। परिसर में विश्राम, ध्यान और योग जैसी गतिविधियों के लिए अत्याधुनिक बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण होगा। साथ ही सुगम भ्रमण पथ, आकर्षक लाइटिंग और त्रेतायुगीन इतिहास से रूबरू कराती विशेष बेंच स्थापित की जाएंगी। 

नई पीढ़ी को इस पौराणिक धरोहर से जोड़ने के लिए क्यूआर कोड युक्त आधुनिक साइनेज भी लगाए जाएंगे। इन क्यूआर कोड को स्कैन करते ही आगंतुक अपने मोबाइल पर स्थल का इतिहास, धार्मिक महत्व और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां देख सकेंगे। परियोजना के प्रथम चरण के लिए 50 लाख रुपए की धनराशि जारी कर दी गई है, जबकि निर्माण कार्य की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) को सौंपी गई है।

" प्रभु श्री राम से जुड़ा है 'रामघाट' का इतिहास"
श्री अष्टावक्र ऋषि आश्रम गोण्डा जनपद के तरबगंज तहसील क्षेत्र के अमदही ग्राम पंचायत में स्थित है। वनवास से लौटने के बाद प्रभु श्रीराम ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया था। जनश्रुति है कि उन्होंने अष्टावक्र ऋषि को भी आमंत्रित किया, लेकिन ऋषि ने छह माह तक चलने वाले यज्ञ अनुष्ठान का हवाला देकर आने में असमर्थता जताई। जिज्ञासावश श्रीराम स्वयं रामघाट स्थित आश्रम पहुंचे।

ऋषि ने बताया कि अनुष्ठान के लिए तीन कोस दूर सरयू से जल लाना पड़ता है। इस पर श्रीराम ने बाण चलाकर सरयू की जलधारा आश्रम तक पहुंचा दी। यह धारा बाद में बरसोत नाम से प्रसिद्ध हुई। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने यहीं स्नान किया। ऋषि अष्टावक्र का यज्ञ संपन्न कराया और उन्हें अपने साथ अयोध्या ले गए। तभी से यह स्थान रामघाट के नाम से जाना जाता है।

" रामायण सर्किट को मिल रहा विस्तार"
रामायण सर्किट को विस्तार देने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार नए आस्था केंद्रों को जोड़ रही है। इसी कड़ी में अब अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए गोंडा स्थित पौराणिक अष्टावक्र ऋषि आश्रम एक नए आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में विकसित हो रहा है। राम जन्मभूमि से महज एक घंटे की दूरी पर तरबगंज क्षेत्र की अमदही ग्राम पंचायत में स्थित यह प्राचीन आश्रम श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति के साथ प्राकृतिक वातावरण का भी अनुभव कराएगा।

राज्य की राजधानी लखनऊ से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 120 किलोमीटर की दूरी तय कर भी यहां ढाई से तीन घंटे में पहुंचा जा सकता है। वहीं, रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए गोंडा जंक्शन निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन है। 

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'त्रेतायुगीन श्री अष्टावक्र ऋषि आश्रम रामघाट जैसे पौराणिक तीर्थ स्थलों का विकास हमारी विरासत को संरक्षित करते हुए भविष्य की संभावनाओं को सशक्त बनाने का माध्यम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार 'विकास भी, विरासत भी' के मंत्र के साथ आस्था, पर्यटन और स्थानीय विकास को एक सूत्र में पिरोकर प्रदेश को धार्मिक पर्यटन मानचित्र शिखर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।'

लेखक के बारे में

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हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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