जाति प्रमाण पत्र आवेदन बिना ठोस और लिखित कारण खारिज करना असंवैधानिक: हाईकोर्ट
वेबसाइट पर सूचना देना ही पर्याप्त नहीं, आदेश में कारण भी बताना जरूरी: कोर्ट
- हाईकोर्ट का आदेश जाति प्रमाण पत्र के आवेदन को बिना ठोस और लिखित कारण बताए खारिज करना संविधान सम्मत नहीं
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी भी व्यक्ति के जाति प्रमाण पत्र आवेदन को बिना ठोस और लिखित कारण बताए खारिज करना संविधान सम्मत नहीं है। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने यह आदेश मथुरा जिले के निवासी आलोक ढांगर और उनकी बहन की याचिका पर सुनाया।
याचिका पर अधिवक्ता विवेक कुमार पाल ने बहस की। उनका कहना है कि याचिकाकर्ता भाई-बहन ने अनुसूचित जाति 'ढांगर' श्रेणी में जाति प्रमाण पत्र के लिए तहसीलदार के समक्ष आवेदन किया था। सभी जरूरी दस्तावेज आधार कार्ड, परिवार रजिस्टर, ग्राम प्रधान का पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र आदि जमा करने के बावजूद 23 फरवरी 2026 को उनका आवेदन केवल 'साक्ष्य अभाव' लिखकर विभागीय वेबसाइट पर खारिज कर दिया गया। न कोई विस्तृत कारण दिया गया, न कोई रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई, और न ही आदेश याचियों को भेजा गया।
कोर्ट ने कहा कि केवल वेबसाइट पर सूचना डाल देना पर्याप्त सूचना देना नहीं है,बिना कारण आवेदन निरस्त करने के ऐसे आदेश को तर्कसंगत आदेश नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक आदेश भी बिना कारण के वैध नहीं हो सकते, और आवेदक काे यह जानने का वैधानिक अधिकार है कि उसका दावा क्यों खारिज हुआ। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक कोई आदेश संबंधित व्यक्ति को सूचित न किया जाए, वह प्रभावी नहीं माना जाता।
उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि आवेदक को रिपोर्ट पर आपत्ति और कमी दूर करने का अवसर दिया जाए। स्वीकृति या अस्वीकृति का विस्तृत कारण सहित आदेश पारित हो, जो 7 दिन में आवेदक को उपलब्ध कराया जाए। वेबसाइट पर रिपोर्ट और आदेश दोनों डाउनलोड करने योग्य लिंक के रूप में उपलब्ध हों।
पूरी प्रक्रिया आवेदन की तारीख से दो महीने के भीतर पूरी हो। न्यायालय ने प्रदेश के मुख्य सचिव को यह आदेश सभी जिलों और तहसील स्तर तक भेजने और तीन महीने में इस पर मानक संचालन प्रक्रिया बनाने पर विचार करने को भी कहा है।
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
