राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: मिटाए गए डिजिटल सबूत, CCTV में कैद कथित करतूत
अकूत संपत्ति और इस्तीफों ने गहराया विवाद
अयोध्या। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब लगातार नए मोड़ ले रहा है। पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में ऐसे कई तथ्य सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिन्होंने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण डिजिटल डेटा हटाकर सबूत मिटाने की कोशिश की, जबकि सीसीटीवी फुटेज में कथित रूप से चढ़ावे की रकम निकालने की गतिविधियां दर्ज मिली हैं। इसके साथ ही कुछ आरोपियों की आय की तुलना में उनकी संपत्ति और रहन-सहन में असामान्य वृद्धि भी जांच का प्रमुख आधार बनी हुई है।

ये खबर भी पढ़े : पंडित दीनदयाल उपाध्याय महा प्रशिक्षण अभियान के अंतर्गत डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म मंडल कार्यशाला संपन्नपुलिस ने इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इनमें टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश, अवनीश शुक्ला और गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। पुलिस की विवेचना और एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर अब जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
ये खबर भी पढ़े : नगर निगम के डम्पर और टैक्सी में भीषण टक्कर, टैक्सी को काटकर चालक को सुरक्षित निकालामोबाइल से डेटा मिटाकर सबूत खत्म करने की कोशिश
जांच में पुलिस ने जब आरोपियों के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच शुरू की तो पता चला कि कई महत्वपूर्ण चैट, कॉल रिकॉर्ड और विशेष रूप से व्हाट्सएप का डेटा डिलीट कर दिया गया था। कुछ मोबाइल फोन पूरी तरह फॉर्मेट किए गए थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि ऐसा कथित रूप से साक्ष्य नष्ट करने और जांच को गुमराह करने के उद्देश्य से किया गया।हालांकि पुलिस अब डिजिटल फोरेंसिक तकनीक के जरिए हटाए गए डेटा को पुनः प्राप्त करने का प्रयास कर रही है। यदि डिलीट की गई जानकारी रिकवर होती है तो जांच में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

मामला सामने आने के बाद भी मिला कथित तौर पर सबूत मिटाने का समय
सूत्रों के अनुसार चढ़ावा चोरी की आशंका सामने आने के बाद कई दिनों तक आंतरिक स्तर पर ही जांच चलती रही। इसी दौरान आरोपियों को कथित रूप से रकम को ठिकाने लगाने और डिजिटल सबूत मिटाने का पर्याप्त समय मिल गया। जांच एजेंसियां अब इस पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार कर रही हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायत सामने आने और एफआईआर दर्ज होने के बीच क्या-क्या गतिविधियां हुईं।
CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा साक्ष्य
जांच एजेंसियों ने मंदिर परिसर के उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। पुलिस का दावा है कि फुटेज में कुछ आरोपी समूह बनाकर कथित रूप से चढ़ावे की रकम निकालते दिखाई दे रहे हैं। जांच के अनुसार कुछ लोग कथित रूप से रकम निकालते थे जबकि अन्य कर्मचारी उन्हें घेरकर खड़े हो जाते थे, जिससे कैमरे में गतिविधियां स्पष्ट न दिखें। लेकिन अलग-अलग कैमरों की रिकॉर्डिंग से पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जांच एजेंसियों को मदद मिली है।फुटेज में कथित रूप से रकम निकालने, उसे सुरक्षित स्थान पर रखने और परिसर से बाहर ले जाने जैसी गतिविधियां दर्ज होने का दावा किया गया है। इन्हीं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।
45 दिन की फुटेज, इसलिए पुराने मामलों पर संशय
जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मंदिर परिसर की केवल लगभग 45 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग ही उपलब्ध हो सकी है। ऐसे में यह स्पष्ट रूप से तय कर पाना मुश्किल है कि कथित गड़बड़ी कब से चल रही थी। पुलिस फिलहाल उपलब्ध फुटेज और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
आय से कई गुना अधिक संपत्ति जांच के घेरे में
एसआईटी ने आरोपियों की संपत्ति, बैंक खातों, निवेश और रहन-सहन का विस्तृत ब्योरा जुटाया है। जांच में कुछ आरोपियों की आर्थिक स्थिति में असामान्य वृद्धि के संकेत मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ लोगों की संपत्ति उनकी घोषित आय की तुलना में कई गुना अधिक पाई गई है।जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि मंदिर से जुड़ने के बाद किन-किन लोगों ने जमीन, प्लॉट, भवन, हॉस्टल या अन्य अचल संपत्तियां खरीदीं और उनके लिए धन का स्रोत क्या था।
बैंक अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ
सूत्रों के अनुसार केवल गिरफ्तार आरोपी ही नहीं, बल्कि गणना प्रक्रिया से जुड़े कुछ बैंक अधिकारी और अन्य कर्मचारी भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। पुलिस उनके बयान दर्ज कर रही है और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। यदि उनकी भूमिका के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

रकम के बंटवारे का विवाद बना खुलासे की वजह!
एसआईटी की जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि कथित तौर पर रकम के बंटवारे को लेकर आरोपियों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ। जांच के अनुसार इसी विवाद के बाद किसी व्यक्ति ने पूरे मामले की शिकायत की, जिससे कथित गड़बड़ी का खुलासा हुआ। हालांकि इस पहलू की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
महासचिव और ट्रस्ट सदस्य का इस्तीफा
मामले के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया है। ट्रस्ट ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि दोनों के इस्तीफों पर 11 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट बैठक में विचार किया जाएगा।
ट्रस्ट ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भगवान श्रीराम को अर्पित प्रत्येक दान और आभूषण सुरक्षित हैं तथा दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक धैर्य रखने की अपील भी की है।
हाईकोर्ट में नई जनहित याचिका
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक नई जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एसआईटी से जांच कराने की मांग की गई है। इस पर 29 जून को सुनवाई संभावित बताई गई है।

दान में मिली चांदी की ईंटों और आभूषणों पर भी उठे सवाल
कुछ सामाजिक संगठनों और दानदाताओं ने पहले आरोप लगाया था कि मंदिर को दान में दी गई चांदी की ईंटों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं है। हालांकि ट्रस्ट ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि सभी दान की गई वस्तुएं सुरक्षित हैं और उनका पूरा लेखा-जोखा उपलब्ध है।
जांच अभी जारी, अंतिम निष्कर्ष शेष
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला अब केवल कथित चोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि डिजिटल साक्ष्यों, आर्थिक लेन-देन, संपत्ति में असामान्य वृद्धि, प्रशासनिक जवाबदेही और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली तक पहुंच गया है। हालांकि जांच एजेंसियों की विवेचना अभी जारी है और कई पहलुओं की पुष्टि होना बाकी है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
