बच्चों में टीबी की पहचान के लिए बाल रोग विशेषज्ञ निभाएंगे भूमिका
— सेंसिटाइजेशन सीएमई का आयोजन
— बच्चों में टीबी के लक्षण व उससे बचाव पर हुई चर्चा
लखनऊ। बच्चों में टीबी के लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे दिखाई देते हैं,जिससे कई बार निदान में देर हो जाती है। यदि परिवार के किसी सदस्य को टीबी है अथवा किसी बच्चे में दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, लगातार बुखार, वजन न बढ़ना, सुस्ती या कुपोषण जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उसकी टीबी की जांच अवश्य करानी चाहिए। ये बातें राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ.ऋषि सक्सेना ने दी।
गुरुवार को इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, लखनऊ शाखा के निजी बाल रोग विशेषज्ञों के लिए शहर के एक होटल में सेंसिटाइजेशन सीएमई का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच और उपचार पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध है। समय पर इलाज से अधिकांश बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि टीबी रोगी के निकट संपर्क में रहने वाले पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों सहित अन्य पात्र संपर्कों को सक्रिय टीबी की जांच के बाद समय पर टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट दिया जाना चाहिए।
उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रवि पांडे ने निजी बाल रोग विशेषज्ञों से टीबी के संदिग्ध मामलों की समय पर जांच ,पुष्टि ,नोटिफिकेशन एवं उपचार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, लखनऊ के अध्यक्ष डॉ. अमित रस्तोगी ने कहा कि बच्चों में टीबी की शीघ्र पहचान के लिए बाल रोग विशेषज्ञों को टीबी के प्रति सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, सही नोटिफिकेशन और राष्ट्रीय उपचार दिशानिर्देशों का पालन करने से बच्चों में टीबी के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ टीबी उन्मूलन अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
डॉ.राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. दीप्ति ने बच्चों में टीबी की जांच की चुनौतियों , निदान की आधुनिक तकनीकों तथा उपचार से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्पष्ट लक्षणों का अभाव, बीमारी की पहचान में आने वाली कठिनाइयां और टीबी से जुड़ा सामाजिक कलंक,स्टिग्मा बच्चों में समय पर टीबी की पहचान में बड़ी बाधा बनते हैं।
वीरांगना अवंतीबाई महिला चिकित्सालय के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान ने कहा कि बच्चों में टीबी के उपचार में अभिभावकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि दवाओं का पूरा कोर्स, नियमित फॉलो-अप और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने से अधिकांश बच्चों को पूरी तरह स्वस्थ किया जा सकता है। उपचार बीच में छोड़ने से बीमारी दोबारा उभरने और दवा-प्रतिरोधी टीबी का खतरा बढ़ सकता है। टीबी हॉस्पिटल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कपिल ने कहा कि बाल टीबी के जटिल मामलों में समय पर रेफरल, विशेषज्ञ परामर्श , नियमित फॉलो-अप तथा राष्ट्रीय उपचार प्रोटोकॉल का पालन बेहतर उपचार परिणाम सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
